म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर सेना की कार्रवाई
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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट को एक साल से ज्यादा हो गया है और उसकी ज्यादतियों की खबरें आए दिन सामने आती रहती है। एक साल के दौरान सेना 4,571 नागरिकों के घर ध्वस्त कर चुकी है। अकेले सागैंग प्रांत में 2,567 घरों को तोड़ा गया। चिन प्रांत में 976, माग्वाय में 626 और कायेह प्रांत में 310 घरों को जमींदोज किया गया। कई जगहों पर घरों को आग के हवाले कर दिया गया। रेडियो एशिया ने डाटा फॉर म्यांमार के हवाले से यह जानकारी दी है।
गांवों को तबाह किया गया
डाटा फॉर म्यांमार के अनुसार, गांव को तबाह करने की कार्रवाई मई 2021 के आखिर में शुरू हुई और अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में इसमें तेजी आई। इसी महीने सेना ने गांव उजाड़े हैं। शहरी क्षेत्रों में घरों को निशाना बनाया गया है।
रेडियो फ्री एशिया के मुताबिक, घरों को टाउनशिप में लक्षित किया गया था, जहां हाल के महीनों में लोकतंत्र समर्थक पीपुल्स डिफेंस फोर्स मिलिशिया और सशस्त्र जातीय समूहों के रूप में जन-विरोधी प्रतिरोध विशेष रूप से उग्र रहा है। यहां सैन्य प्रतिक्रियाएं भी बेहद गंभीर रही हैं।
म्यांमार में सेना पिछले वर्ष एक फरवरी को लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर सत्ता पर काबिज हो गई थी। सरकार की मुखिया आंग सान सू की समेत तमाम नेताओं को जेल में डाल दिया गया।
तख्तापलट के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन
म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को हुए तख्तापलट के बाद से उथल-पुथल है। जब वरिष्ठ जनरल मिंग आंग हलिंग के नेतृत्व में म्यांमार की सेना ने नागरिक सरकार को उखाड़ फेंका और एक साल के लिए आपातकाल की घोषणा की। तख्तापलट के चलते देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और पूरे देश में घातक हिंसा का सामना करना पड़ा। इस दौरान सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।