Revanth Reddy Remakrs Row: तेलुगु भाषा में 'नेने राजू, नेने मंत्री' जिसका हिंदी अर्थ 'मैं ही राजा, मैं ही मंत्री' है। कुछ ऐसा ही बयान देकर तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी विवादों में घिर गए हैं। हालांकि अब उन्होंने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया। पढ़ें, उन्होंने और क्या कुछ कहा है...
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अपने चर्चित बयान 'नेने राजू, नेने मंत्री' (मैं ही राजा, मैं ही मंत्री) को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब खुद को शासक बताना नहीं था, बल्कि यह कहना था कि मुख्यमंत्री और नगर प्रशासन मंत्री होने के नाते नगर निकाय चुनावों के नतीजों की जिम्मेदारी उन्हीं की है।
पहले क्या कहा था और अब क्या सफाई दी?
मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान की थी। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य की राजनीति या कांग्रेस पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। रविवार को हैदराबाद में संत सेवालाल जयंती समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा वे खुद को शासक नहीं, बल्कि जनता का सेवक मानते हैं। उनका उद्देश्य हमेशा गरीब और कमजोर वर्गों के लिए काम करना है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो खुद को जन्म से शासक मानते हैं- यह विपक्ष पर उनका निशाना था।
विज्ञापन
नगर चुनाव और सरकार का दावा
सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस को नगर निकाय चुनावों में 85-90% तक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि वे जीत में अहंकार नहीं करते और हार में निराश नहीं होते।
आदिवासी और लांबाड़ा समाज पर घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने लांबाड़ा समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, यह समुदाय तेलंगाना आंदोलन में महत्वपूर्ण रहा है। राज्य सरकार अब आधिकारिक रूप से संत सेवालाल जयंती मनाएगी। थांडा (आदिवासी बस्तियों) में पक्की सड़कें, स्कूल और ग्राम पंचायत भवन बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सोलर प्लांट के जरिए बिजली पहुंचाने की योजना है।
सामाजिक न्याय पर भी दिया जोर
इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार दलित और आदिवासी वर्गों को प्राथमिकता दे रही है। राज्य में अनुसूचित जातियों की आबादी 15% है, लेकिन उन्हें 30% सरकारी पद दिए गए हैं। वहीं चार मंत्री और विधानसभा स्पीकर पद भी एससी समुदाय को मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य कमजोर वर्गों को शासन में भागीदार बनाना और उन्हें अच्छी शिक्षा व सुविधाएं देना है।