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मुजफ्फर ऊर्फ विवेक गुलबर्ग सोसायटी का नया सच

Mon, 06 Jun 2016 08:34 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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muzaffar
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मुजफ्फर ऊर्फ विवेक गुलबर्ग सोसायटी की दर्दनाक घटना के बाद सामने आया। दिल को हिला कर रख देने वाला किस्सा। 
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जुबेनिसा और सलिम सेख ने इस घटना में अपने दो साल के बेटे मुजफ्फर को खो दिया था। शायद इस दिन अहमदाबाद ने अपने इतिहास का सबसे भयानक नरसंघार देखा था। उस दिन गुलबर्ग सोसायटी में उन्नहत्तर लोगों की जान गई थी।

इस घटना के दौरान ही जुबेनिसा और सलिम सेख अपने बच्चे मुजफ्फर को खो दिया। अगले छह साल तक वह दोनो अपने बच्चे को तलाशता रहे पर उन्होंने अपने बच्चे के बारे में किसी से कुछ नही सुना।
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लम्बी तलाश के बाद उन्होंने मुजफ्फर को शहर के दुसरे हिस्से में पाया। जो विवेक के रुप में विना पटानी के घर में पल रहा था। विना पटानी एक विधवा महिला है। जो मछली और सब्जियां बेचती है।
 
सलिम सेख ने कहा उस दिन जब गुलबर्ग सोयायटी जल रही थी। चारो तरफ अफरा-तफरी का महौल था। ऐसे में एक कांस्टेबल ने मेरे बच्चे को बचाया। और चुपचाप उसे अपने एक दोस्त विक्रम पटानी को सौंप दिया।

विक्रम पटानी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा ने अपने दो और बच्चों के साथ मुजफ्फर को भी पाल रही है। सेख ने कहा है कि वह अपने बच्चे को वापस पाने के लिए एसआईटी से मद्द माँग रहे है।

वही डीएनए टेस्ट से यह साफ हो गया है कि विवेक ही सलिम सेख का बेटा मुजफ्फर है जो आठ साल की ऊम्र मे खो गया था। वहीं जब विवेक को निचली अदालत में उसके असली माता पिता के पेश किया गया तो उसने अपने मुस्लिम माता-पिता के पास जाने से इंनकार कर दिया।
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साल 2009 से यह मामला गुजरात हाई कोर्ट में है। सलिम सेख का कहना है कि वह किसी भी प्रकार का समझोता नही करेंगे। यह एक सजिश है जिस कारण उनके बेटे को उनके घर नही भेजा जा रहा है। और न ही उन्ंहे उससे मिलने दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आठ महीने पहले उन्होंने अपने बेटे को देखा था।         
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