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बंगाल: 'गोहत्या से बचें मुसलमान, गाय को घोषित करें राष्ट्रीय पशु', कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम की अपील

Sun, 17 May 2026 08:31 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम ने मुसलमानों से हिंदू भावनाओं का सम्मान करते हुए गोहत्या से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के नए नियमों और जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण पशु वध करना मुश्किल हो गया है। इमाम ने लाउडस्पीकर नियमों का पालन करने और मस्जिद समितियों से प्रशासन के साथ सहयोग करने की भी अपील की। पढ़िए रिपोर्ट-
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मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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कोलकाता की प्रसिद्ध नखोदा मस्जिद के इमाम ने रविवार को मुसलमानों से अपील की कि वे गाय की कुर्बानी से बचें, ताकि हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के नए नियमों के कारण पशुओं की हत्या करना बहुत कठिन हो गया है, क्योंकि इसके लिए जरूरी स्थानीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
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मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने पीटीआई से कहा, अगर सरकार जरूरी सुविधाएं नहीं दे सकती, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए और गाय की हत्या और गोमांस निर्यात पर पूरी तरह रोक लगानी चाहिए। 

सरकार ने जारी किए नए नियम
पश्चिम बंगाल सरकार ने पिछले हफ्ते नए नियम जारी किए हैं, जिनमें कहा गया है कि बिना 'फिटनेस सर्टिफिकेट' के किसी भी जानवर की हत्या नहीं की जा सकती। इस सर्टिफिकेट को अधिकारी देंगे। इसमें बैल, सांड, गाय, बछड़े और भैंस की उम्र और उनकी शारीरिक स्थिति की जांच की जाएगी। नियम के अनुसार, केवल वही जानवर काटे जा सकते हैं, जिनकी उम्र 14 साल से अधिक हो या जो चोट, बीमारी, उम्र या किसी गंभीर और असाध्य रोग के कारण स्थायी रूप से अक्षम हों।
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मौलाना कासमी ने कहा कि सरकार को इसके लिए पहले पूरी व्यवस्था करनी चाहिए। हर जगह बूचड़खाने बनाने चाहिए और हर बाजार में पशु चिकित्सक उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने कहा, अगर सरकार यह व्यवस्था नहीं कर सकती, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए और पूरे देश में गोहत्या और बूचड़खानों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

'हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली चीजों से बचें मुसलमान'
धार्मिक स्थलों में पशु बलि और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के मुद्दे पर कासमी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को उन चीजों से बचना चाहिए, जो दूसरे धर्मों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं। उन्होंने कहा, हम अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करते हैं, कृपया गाय की कुर्बानी न करें क्योंकि इससे हमारे हिंदू भाइयों की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जगह बकरी की कुर्बानी दी जा सकती है।

पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम का जिक्र करते हुए कासमी ने कहा कि यह कानून 1950 से लागू है और अब इसे ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने मुसलमानों को कुछ स्वतंत्रता दी थी। लेकिन उन्होंने इसका स्थायी समाधान नहीं दिया। यह सरकार केवल कानून को सख्ती से लागू कर रही है।

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मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर क्या कहा?
मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि यह नियम 1996-97 के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर आधारित है और इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है। उन्होंने बताया कि ध्वनि की अनुमति के मानक इस प्रकार हैं- औद्योगिक क्षेत्रों में 75-80 डेसिबल, वाणिज्यिक क्षेत्रों में 70-75 डेसिबल, आवासीय क्षेत्रों में 65-70 डेसिबल और साइलेंस जोन में 40-45 डेसिबल।
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कासमी ने कहा कि कुछ ग्रामीण इलाकों में पुलिस की ओर से मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाने की खबरें आई हैं, जो नियमों को गलत समझने के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि माइक्रोफोन पूरी तरह हटाने का कोई नियम नहीं है और उन्होंने मस्जिद समितियों से अपील की कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें और सुनिश्चित करें कि माइक्रोफोन का उपयोग तय ध्वनि सीमा से अधिक न हो।
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