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कोर्ट में बोला लॉ बोर्ड- महिलाएं दे सकती हैं तीन तलाक, हो रहा व्हाट्सएप का भी इस्तेमाल

Wed, 17 May 2017 09:54 AM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
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फाइल फोटो
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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अदालत को बताया कि मुस्लिम समुदाय में शादी एक कांट्रैक्ट है। ऐसे में महिलाएं अपने हितों और अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए उसमें कुछ शर्तें रख सकती हैं।
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एजाज मकबूल के माध्यम से बहस करते हुए पर्सनल लॉ बोर्ड ने चीफ जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच को बताया कि निकाह से पहले महिलाओं के पास चार विकल्प मौजूद हैं। इनमें विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत शादी दर्ज कराने का आग्रह भी शामिल है।

मुस्लिम लॉ बोर्ड ने कहा कि इसके अलावा महिलाएं निकाहनामा को लेकर भी कई शर्तों पर बातचीत कर सकती हैं। यहां तक कि अपनी गरिमा की रक्षा के लिए महिलाओं को भी सभी सूरतों में तीन तलाक कहने का अधिकार है। वहीं पति द्वारा तलाक देने की स्थिति में मेहर की ऊंची रकम की भी मांग कर सकती हैं।
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वहीं पिछली सितंबर में शायरा बानों और अन्य की याचिका के जवाब में एआईएमपीएलबी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा था कि "शरिया में पुरुषों को तीन तलाक कहने का अधिकार दिया गया है क्योंकि उके अंदर फैसले करने की क्षमता ज्यादा होती है।"
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क्या ई-तलाक भी हो रहा है : सुप्रीम कोर्ट

- फोटो : SELF
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने मुस्लिम लॉ बोर्ड का पक्ष रखते हुए कहा कि संबिधान का अनुच्छेद 371 किसी भी समुदाय के रीति-रिवाजों और प्रथाओं की रक्षा का अधिकार देता है। पिछले साल सितंबर में बोर्ड ने कहा था कि कुरान और हदीस पुरुषों को चार पत्नियां रखने की इजाजत तो देता है लेकिन वो इसे प्रोत्साहित कतई नहीं करता।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कूरियन से वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या ई-तलाक भी हो रहा है? मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के पास मुस्लिम महिलाओं की ओर से शिकायत की गई है कि व्हाट्स एप और फेसबुक के जरिए पति ने उनसे तलाक लिया है। जवाब में सिब्बल ने कहा, हां व्हाट्स एप से भी तलाक हो रहा है।
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