40 साल पहले पापा से हुई थी अकंल की मुलाकात
नसीर के बेटे अरमान ने चिता को अग्नि दी। नसीर ने कहा, 'हम 12वें दिन अरमान का सिंर मुंडवाएंगे क्योंकि हिंदू इस रिवाज को मानते हैं।' इन भाईयों के पिता का नाम भिखू कुरैशी था। उनकी और पांड्या का मुलाकात 40 साल पहले तब हुई थी जब वह मजदूर थे। कुरैशी की तीन साल पहले मौत हो गई। जिससे पांड्या टूट गए थे। अबु ने कहा, 'पांड्या अकंल का परिवार नहीं था। इसलिए जब कई साल पहले उनका पैर टूटा तो हमारे पिता ने उन्हें हमारे साथ रहने को कहा। वह हमारे परिवार का हिस्सा बन गए।'
दिल से मनाते थे ईद का त्योहार
नसीर ने कहा, 'हमारे बच्चे उन्हें दादा कहकर बुलाते थे और हमारी पत्नियां उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेती थीं। अंकल पूरे दिल से ईद का त्योहार मनाते थे। वह बच्चों के लिए कभी तोहफे लाना नहीं भूलते थे।' जब तक भानुशंकर जिंदा रहे कुरैशी के परिवार ने उनके लिए हमेशा शाकाहारी खाना बनाया। अमरेली जिले के ब्रह्म समाज के उपाध्यक्ष पराग त्रिवेदी ने कहा, 'हिंदू रीति-रिवाजों से भानुशंकर का अंतिम संस्कार करने से अबु, नसीर और जुबेर ने सांप्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल कायम की है।'