फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुर्शिदाबाद हिंसा: 'सिंदूर पोंछ-चूड़ियां उतार हमारे साथ चलो...पतियों को छोड़ देंगे'; पीड़ितों ने सुनाई आपबीती

सार

उस रात का दर्द सुनाने को आज मेरे पास न तो हिम्मत है, और न ही कलेजा। दिल धक्क से बैठ जाता है। आज भी रात को नींद नहीं आती। कानों में चीख पुकार गूंजती है। एक साथ ही रहने वाले कैसे हैवान बन सकते हैं। कैसे हमारे कपड़ों को खींच सकते हैं। मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की बानगी पीड़ितों ने कुछ ऐसे ही सुनाई। आपबीती सुनाते हुए उनकी आवाज से उनका खौफ भी बयां हो रहा था.... 
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिंसा का दर्द पीड़ितों के चेहरे आंसू बनकर बह रहे हैं। खौफ इतना है कि खटका होते ही पूरा परिवार नींद में भी चौंक जा रहा है।  बेदवान की महिलाएं उस दिन की हैवानियत की बात सुनाते हुए फूट-फूट कर रो पड़ती हैं। एक महिला अपनी दर्द की कहानी सुनाते हुए फफक-फफक कर रोते हुए बोली-कई उपद्रवी मेरे घर में घुस आए। मुझे पकड़ लिया। हाथ पर खरोंच के निशान दिखाते हुए बोली, किसी तरह अपने को बचाया। एक उपद्रवी ने कहा तुम जिंदा रहना चाहती हो तुम अपना सिंदूर पोंछ लो, ये चुड़ियां तोड़ डालों और हमारे साथ चलो। तुम्हारे पति को छोड़ देंगे। अगर तुम हमारे साथ चलोगी, तभी तुम जिंदा रह पाओगी।  कहते हुए-फफक-फफक कर रो पड़ती हैं।

विज्ञापन


राष्ट्रपति जी, आप हम महिलाओं की पुकार सुनिए
भय और इज्जत खोने की डर से त्रस्त बेदवान की महिलाओं ने प्रधानमंत्री और महामहिम राष्ट्रपति से कातर अपील की है। महिलाओं ने कहा, हम हाथ जोड़ कर महामहिम राष्ट्रपति जी से विनती करती हैं, आप एक महिला हैं। किसी महिला की इज्जत ही महिला का सब कुछ होता है। आपसे विनम्र निवेदन है कि हमको बचा लीजिए। हम बहुत डरी हुई हैं।

चुन-चुनकर हिंदुओं को बनाया निशाना
उस दिन धूलियान शहर में हजारों की भीड़ ने चुन-चुन कर हिंदु दुकानों को निशाना बनाया। शहर के दुकानदार अभी तक उस दहशत से उबर नहीं पाए हैं। एक दुकानदार बंद दुकान के बाहर फीता लेकर एक नाप-जोख कर रहे थे। उनसे पूछा कि यह क्या कर रहे हैं तो कहा, लोहे की गार्ड लगाने की तैयारी कर रहा हूं। बहुत कर्ज लेकर दुकान बनाया है, कहीं ऐसा न हो कि फिर उपद्रवी दुकानों पर हमला बोल दें, और दुकान को जला दें।
विज्ञापन


दो सौ मीटर दूर पहुंचने में पुलिस को लग गए 4 घंटे
अपने जले हुए घर को दिखाते हुए धुलियान निवासी एक बुजुर्ग ने कहा, हमें पुलिस पर कोई भरोसा नहीं है। उस दिन पुलिस केवल मूक दर्शक बनी रही। एक तरफ उपद्रवियों के डर से खुद को बचा रहे थे, घर के एक कमरे में किसी तरह से बच्चों को लेकर छिपे हुए थे, और लगातार पुलिस को फोन कर रहे थे। लेकिन पुलिस ने उस वक्त किसी तरह की मदद नहीं की। उन्होंने कहा, आप सोचिए, हमारा घर पुलिस थाने से केवल और केवल दो सौ मीटर दूर है। लेकिन पुलिस आई चार घंटे बाद। ऐसी पुलिस पर भरोसा करें तो कैसे करें। 

इसे भी पढ़ें- West Bengal: मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच करेगी एसआईटी; नौ सदस्यीय टीम गठित
विज्ञापन


पीड़ित बोले-उपद्रवियों ने 40 से अधिक मंदिर तोड़े
धूलियान के 82 वर्षीय षष्टी घोष बताते हैं कि शुक्रवार को 12 बजे मस्जिद से घोषणा हुई कि वक्फ बोर्ड के विरोध में हमको दो बजे रैली करना है। आप जहां भी हैं, वहां इकट्ठा हो जाइए। करीब 15 से 20 हजार लोग रैली में शामिल थे। रैली जब हिंदुओं के इलाके में पहुंची तो घोषपाड़ा में इन्होंने पत्थरबाजी की और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। गौरांग मंदिर उसके बाद दुर्गा मंदिर पर आग लगा दी। यहां पर जब प्रतिवाद हुआ तो वे वहां से चले गए। इस दौरान कई दुकानों में तोड़ फोड़ की और दुकानों को आग के हवाले किया। इसके बाद उन्होंने डाक बंगला के बाद शितला मंदिर में तोड़ फोड़ की, काली मंदिर में तोड़फोड़ की। वहां के हिंदुओं के घरों में तोड़ फोड़ की, लूटपाट की और आग के हवाले किया। उसके बाद वे चले गए रेल गेट का सिग्नल तोड़ा, ट्रेफिक लाइट का सिग्नल तोड़ा। करीब 40 मंदिरों में तोड़फोड़ की।

इसे भी पढ़ें- Murshidabad Violence: 'आज भी रात को नींद नहीं आती, कानों में गूंजती है चीख-पुकार'; पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें