पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगर निकाय भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज कर दी है। इसी कड़ी में राज्य के पूर्व खाद्य मंत्री रथिन घोष शुक्रवार को साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय में पेश हुए। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने घोष से करीब साढ़े नौ घंटे तक पूछताछ की। मैराथन पूछताछ के बाद बाहर निकले पूर्व मंत्री ने मीडिया से संक्षिप्त बात करते हुए कहा, 'मुझसे जो भी सवाल पूछे गए, मैंने उनके जवाब दे दिए हैं। अंदर क्या बातचीत हुई, इस पर मैं फिलहाल कुछ नहीं कहूंगा।'
सुजीत बसु की गिरफ्तारी के बाद रडार पर पूर्व मंत्री
गौर करने वाली बात यह है कि बीते मंगलवार को ही ईडी ने इसी घोटाले में पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बसु को गिरफ्तार किया था। सूत्रों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में हुई वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को पैसे लेकर नौकरी देने के मामले में सुजीत बसु और रथिन घोष के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। जांच एजेंसी अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जो इन दोनों नेताओं को सीधे तौर पर इस घोटाले से जोड़ती हैं।
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पांच बार टालने के बाद आखिरकार पेश हुए घोष
रथिन घोष को इससे पहले भी ईडी कई बार समन भेज चुकी थी। हालांकि, वे कभी विधानसभा चुनाव की व्यस्तता तो कभी बाथरूम में गिरकर सिर में चोट लगने जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर पेशी से बचते रहे। रिकॉर्ड के अनुसार, वह पिछले पांच समन पर उपस्थित नहीं हुए थे। शुक्रवार को भारी सुरक्षा और मीडिया के जमावड़े के बीच वे आखिरकार जांच अधिकारियों के सामने हाजिर हुए।
अयन शील के दस्तावेजों ने खोले राज
ईडी सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी अयन शील की गिरफ्तारी और उसके ठिकानों से मिले संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर ही रथिन घोष का नाम सामने आया है। जांच एजेंसी विशेष रूप से मध्यग्राम नगरपालिका के चेयरमैन और दक्षिण दमदम नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों की जांच कर रही है। इससे पहले सीबीआई भी उनसे पूछताछ कर चुकी है और उनके आवास की तलाशी ली जा चुकी है।