प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने नगरपालिका भर्ती घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री (अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग) और पूर्व विधायक सुजीत बोस को चार दिन पहले गिरफ्तार किया था। बोस को कोलकाता के विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।
जांच के दौरान, ईडी ने सुजीत बोस को कई बार बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया, लेकिन उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। वे व्यस्तता का हवाला देते हुए बार-बार सुनवाई स्थगित करने की मांग करते रहे। इसके चलते वे लगातार ईडी के समक्ष पेश होने से बचते रहे। पेशी के दौरान भी उन्होंने टालमटोल भरे जवाब दिए और पूछताछ के दौरान असहयोगी बने रहे। आरोप है कि बोस और उनसे जुड़े लोगों ने सरकारी 'जॉब' बेचकर फ्लैट खरीदे थे।
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कई फ्लैटों के रूप में अपराध की प्रत्यक्ष आय ...
पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला है कि सुजीत बोस को कई लोगों को रोजगार दिलाने के बदले में फ्लैटों के रूप में अपराध की प्रत्यक्ष आय प्राप्त हुई है। उन्होंने इसके जरिए करोड़ों की नकद राशि अर्जित की। बोस ने अपने कथित व्यावसायिक उपक्रमों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की है। कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले में जांच शुरू की है। यह उल्लेखनीय है कि ईडी ने सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य के मामले में सीएएन 1/2023 के साथ डब्ल्यूपीए 9979/2022 में सीएएन 2/2023 आवेदन दायर किया था, जिसमें पश्चिम बंगाल राज्य में फैली नगरपालिकाओं में विभिन्न पदों की भर्ती में की गई अवैधताओं से संबंधित अपनी जांच के निष्कर्षों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
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केवल शिक्षकों की भर्ती तक घोटाला सीमित नहीं ...
प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की ईडी द्वारा की गई जांच के दौरान, 2023 में अयान सिल और अन्य से जुड़े विभिन्न परिसरों पर तलाशी ली गई थी। तलाशी के दौरान, अयान सिल के कब्जे से कई आपत्तिजनक दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए थे। आपत्तिजनक दस्तावेजों की जांच से पता चला कि घोटाला केवल शिक्षकों की भर्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न नगरपालिकाओं (कांचरापरा, न्यू बैरकपुर, कमरहटी, टीटागढ़, बारानगर, हलीशहर, दक्षिण दमदम (उत्तर), दमदम आदि) द्वारा की गई कई अन्य नियुक्तियां भी शामिल हैं। इनमें मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क, चपरासी, एम्बुलेंस अटेंडेंट, सहायक मिस्त्री, पंप ऑपरेटर, हेल्पर, सफाई सहायक, ड्राइवर आदि की भर्ती शामिल है।
प्रश्न पत्रों और ओएमआर शीट की छपाई ...
अब तक की गई जांच से पता चला है कि विभिन्न नगर निगमों, नगरपालिकाओं आदि से संबंधित ठेके, जैसे प्रश्न पत्रों की छपाई, ओएमआर शीट की छपाई, उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने आदि के लिए एक ही कंपनी, मेसर्स एबीएस इंफोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड (निदेशक- अयान सिल) को दिए गए थे। अयान सिल और अन्य उच्च पदाधिकारियों, जिनमें सरकारी कर्मचारी और राजनीतिक नेता शामिल थे, ने अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। उस साजिश के अनुसरण में, मेसर्स एबीएस इंफोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अयान सिल ने ओएमआर शीट की छपाई, डिजाइनिंग और मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार होने के नाते अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग करते हुए, उम्मीदवारों की ओएमआर शीट में हेराफेरी की। नगरपालिकाओं में कई अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्तियों में मौद्रिक और अन्य लाभों के बदले में सहायता की।
लगभग 3.45 करोड़ रुपये की नकदी जब्त ...
इससे पहले, ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व विधायक और पूर्व अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस के कार्यालय सहित कई परिसरों पर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान, घोटाले से जुड़े विभिन्न परिसरों से संपत्ति संबंधी दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और लगभग 3.45 करोड़ रुपये नकद सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
ईडी ने कोलकाता स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में अयान सिल के खिलाफ अभियोग शिकायत दर्ज कराई है। ईडी ने नगरपालिकाओं के विभिन्न पदाधिकारियों के परिसरों, पूर्व विधायक सुजीत बोस और पश्चिम बंगाल के पूर्व विधायक और पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष के आवासीय परिसरों पर भी तलाशी ली थी।