चेन्नई पुलिस ने आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के केस को करीब 7 सालों तक लटकाए रखा। अब चेन्नई पुलिस ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करते हुए केस को मुंबई पुलिस को सौंपा, तो मुंबई पुलिस ने चेन्नई पुलिस को दो टूक ये कहते हुए फाइल लौटा दी कि इस मामले में एफआईआर चेन्नई में दर्ज हुई थी। इसलिए इसकी जांच भी चेन्नई पुलिस ही करे।
तमिलनाडु पुलिस ने टेरिटोरियल ज्यूरिडिक्शन के लिहाज से केस को मुंबई पुलिस को सौंपने के लिए फाइल भेजी थी। पर मुंबई पुलिस ने उसे लौटा दिया। इस मामले को लेकर कुछ दिनों पर पहले ही तमिलनाडु पुलिस ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। और मामले को 14 जून को मुंबई पुलिस के पास भेज दिया था। इस मामले को चेन्नई पुलिस ने करीब 7 सालों तक अपने पास दबाए रखा। और जब मुंबई पुलिस के पास 'स्पीडी प्रोब' के लिए भेजा, तो मुंबई पुलिस ने कहते हुए फाइल लौटा दी कि मामले में एफआईआर चेन्नई में दर्ज हुई थी।
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मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट(सीबीसीआईडी) के एडिशनल डीजीपी के जयंत मुरली ने फाइल लौटाने की बात स्वीकारते हुए इंडिया टुडे से कहा कि हमने कानूनी तौर पर फाइल को लौटाया है। चूंकि मामला चेन्नई में दर्ज हुआ था। हम इस मामले को राज्य सरकार के पास भेज रहे हैं, वहां से जो निर्देश मिलेंगे, हम उसी हिसाब से काम करेंगे।
बीसीसीआई की ओर से दर्ज कराए गए ममाले में ललित मोदी के खिलाफ 425 करोड़, 125 करोड़, 200 करोड़ और 3.5 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाया था।
बता दें कि साल 2010 में चेन्नई पुलिस ने ललित मोदी और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। ये एफआईआर तत्कालीन बीसीसीआई प्रमुख एन.श्रीनिवासन ने दर्ज कराई थी। बाद में इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। और इसके साथ ही सेक्शन 420(धोखाधड़ी) के अलावा 120-बी के तहत आपराधिक साजिश का मामला भी दर्ज कराया था। इस मामले में बाद में चेन्नई पुलिस ने कई और धाराएं भी जोड़ी थी। पर अबतक इस मामले में जांच तक शुरू नहीं हुआ।