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मुंबई: पांचवीं-छहवीं लाइन चालू होने से मध्य रेलवे के यात्रियों को बड़ी राहत, लोकल-एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए होंगे अलग रास्ते

Wed, 09 Feb 2022 12:18 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, मुंबई

सार

मुंबई शहरी परिवहन परियोजना फेज-2 के तहत 2008-09 में ठाणे और दिवा के बीच पांचवीं और छहवीं लाइनों पर काम को मंजूरी दी गई थी, जिसमें रेल मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार द्वारा समान लागत साझा की गई है।
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मुंबई लोकल ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुंबई में रेल से सफर करने वाले यात्रियों को एक और राहत देते हुए मध्य रेलवे ने पांचवीं और छहवीं लाइन को चालू कर दिया है। 72 घंटे के ब्लॉक के बाद मंगलवार को ठाणे और दिवा के बीच पांचवीं और छहवीं लाइन को चालू कर दिया गया। इस लाइन के चालू होने से उपनगरीय क्षेत्रों में जाने वाली ट्रेनों और लंबी दूरी की ट्रेनों को अलग-अलग रास्ते मिल गए हैं। जिससे यात्रियों को अधिक सेवाओं और समय पर संचालन के होने से राहत मिलेगी।

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अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि अप्रैल, 2011 में कुर्ला और ठाणे के बीच पांचवीं और छठी लाइनों के चालू होने के एक दशक से भी अधिक समय बाद कुर्ला और कल्याण के बीच लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लाइनों को अलग करने का काम पूरा हो गया है। 

लोकल और मेल-एक्सप्रेस के लिए अलग ट्रैक
मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने कहा, "ठाणे-दिवा 5वीं और 6वीं लाइन का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। कॉरिडोर को अलग करने से ट्रेनों की समयपालन में सुधार होगा और हमें ज्यादा से ज्यादा उपनगरीय ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रास्ते बनाने में मदद मिलेगी। इससे ट्रेनों की गति बढ़ने के साथ-साथ लोकल ट्रेनों के फेर भी बढ़ जाएंगे।"
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सुतार ने कहा, "इस खंड पर लाइनों को काटने और जोड़ने का काम करने के लिए कई जगहों पर ब्लॉक किया गया था। 18, 24, 36, 14 की अवधि वाले प्रमुख ब्लॉक सफलतापूर्वक संचालित किए गए थे और 72 घंटे के मेगा ब्लॉक का संचालन किया गया था।" 

मुंबई शहरी परिवहन परियोजना (एमयूटीपी) फेज-2 के तहत 2008-09 में ठाणे और दिवा के बीच 5वीं और 6वीं लाइनों पर काम को मंजूरी दी गई थी, जिसमें रेल मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार द्वारा समान लागत साझा की गई है। यह परियोजना, जिसे मूल रूप से दिसंबर, 2015 में पूरा किया जाना था, लेकिन 1.4 किलोमीटर लंबे रेल फ्लाईओवर, तीन बड़े और 21 छोटे पुलों के साथ-साथ 170 मीटर की सुरंग का निर्माण की वजह से इसमें देरी हुई। देरी होने से परियोजना की लागत 130 करोड़ रुपये से बढ़कर 440 करोड़ रुपये हो गई। 

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