साइबर पुलिस ने एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने गिरोह के 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर तुरंत ऑलनाइन कर्ज देकर लोगों का उत्पीड़न करने का आरोप है। इसके लिए वे मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते थे।
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मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त सुहास वार्के ने बताया कि साइबर पुलिस ने 14 करोड़ रुपये नकद और 2.17 लाख अमेरिकी डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी रखने वाले 350 बैंक खातों के लेन-देन पर रोक लगा दी है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान 39 मोबाइल फोन, 211 सिम कार्ड, 19 लैपटॉप, दो हार्ड डिस्क और तीन राउटर जब्त किए गए। एक अधिकारी ने बताया कि यह रैकेट तब सामने आया, जब 20 मई को एक व्यक्ति ने धोखाधड़ी और उत्पीड़न की शिकायत के साथ पश्चिम क्षेत्र के साइबर पुलिस थाने में संपर्क किया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने अपनी मां के इलाज के लिए 10 इंस्टेंट लोन एप के जरिए 3.85 लाख रुपये का कर्ज लिया था और उसने कर्ज की रकम के खिलाफ 22 लाख रुपये चुका दिए थे।
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अधिकारी ने कहा कि कर्ज चुकाने के बावजूद आदमी को इन कंपनियों के अधिकारियों से धमकियां मिलती रहीं, जिन्होंने उससे कहा कि वे उसकी संपर्क सूची में लोगों को उसकी मॉर्फ्ड तस्वीरें भेज देंगे। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपी अपने आकाओं से संपर्क स्थापित करने के लिए डिंग टॉक एप और ग्राहकों से संपर्क करने के लिए क्लिक टू चैट और एनएक्स क्लाउड का इस्तेमाल कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि मोबाइल एप पर तुरंत कर्ज के लिए आवेदन करते समय आवेदकों का सारा व्यक्तिगत डेटा आरोपियों की कंपनी में चला जाता था। इसका इस्तेमाल आरोपी कर्ज चुकाने में विफल रहने वाले लोगों के उत्पीड़न के लिए करते थे। आरोपी कथित तौर पर अश्लील तस्वीरें बनाकर कर्ज चुकाने में विफल रहने अथवा ब्याज का भुगतान नहीं करने वाले लोगों को परेशान करते थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों को बंगलूरू, आंध्र प्रदेश, गुरुग्राम, मुंबई और उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारियां पिछले एक हफ्ते के दौरान की गई हैं।