मुंबई की एक अदालत ने विधानसभा परिसर में हुई मारपीट के मामले में गिरफ्तार दो राजनीतिक समर्थकों को जमानत दे दी है। ये समर्थक एनसीपी (शरद) विधायक जितेंद्र आव्हाड और बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर से जुड़े थे। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी जमानत की शर्तों का पालन करने को तैयार हैं, इसलिए उन्हें जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (प्रभारी), एस्प्लेनेड कोर्ट केएस जानवर ने सोमवार को आव्हाड के समर्थक नितिन देशमुख और पडलकर के समर्थक सरजे राव टकले को जमानत दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस को पर्याप्त कस्टडी मिलने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह घटना किसके कहने पर हुई। साथ ही जांच में किसी भी ठोस मकसद का पता नहीं चला।
25 हजार के मुचलके पर मिली जमानत
दोनों आरोपियों को ₹25,000 के जमानती बॉन्ड पर रिहा किया गया। इनकी गिरफ्तारी 18 जुलाई को उस समय हुई जब मानसून सत्र के दौरान विधानसभा भवन के लॉबी क्षेत्र में दोनों दलों के समर्थक आपस में भिड़ गए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां उन्हें पहले पुलिस रिमांड में भेजा गया और फिर न्यायिक हिरासत में रखा गया।
दलील सुनने के बाद क्या बोली अदालत?
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस समय जांच मुख्यतः तकनीकी है, जैसे घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा करना। ऐसे में दोनों आरोपियों को जेल में रखना अब व्यर्थ है। अदालत ने माना कि दोनों जमानत की शर्तों का पालन करने को तैयार हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जा सकता है।
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पुलिस ने दी थी जमानत का विरोध करने की दलील
हालांकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना गंभीर थी और जांच अभी जारी है। पुलिस ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। लेकिन अदालत ने यह मानते हुए कि अब तक जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, जमानत को मंजूरी दे दी।
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एक दिन पहले हुई थी दोनों नेताओं में बहस
झड़प की यह घटना 17 जुलाई को विधानसभा भवन की ग्राउंड फ्लोर पर हुई, जब मानसून सत्र जारी था। एक दिन पहले, 16 जुलाई को, दोनों विधायक आपस में तीखी बहस में उलझ गए थे। इसके बाद उनके समर्थकों के बीच टकराव हुआ। मरीन ड्राइव पुलिस ने इस मामले में अनधिकृत जमावड़ा, सार्वजनिक शांति भंग करने की मंशा से अपमान, और दंगा रोकने वाले सार्वजनिक सेवक को बाधित करने जैसे आरोप लगाए थे।