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जन्मदिन विशेषः मुलायम और अखिलेश के बीच प्यार जताने वाले किस्से

Tue, 22 Nov 2016 06:10 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो: मुलायम के साथ अखिलेश - फोटो : Social Media
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हालिया समय में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के परिवार में कलह खुलकर सामने आई। इस कलह एक तरफ उनका बेटा था, तो दूसरी तरफ भाई। मुलायम सिंह के लिए यह बड़ा धर्मसंकट था, जिसे उम्र की ढलती सांझ में उन्हें सुलझाना था। मुलायम ने बेटे को झिड़का, तो भाई को प्यार से आवाज दी और मामले को संभाल लिया। हालांकि बाहरी तौर पर भले ही यह दिखता रहा हो कि मुलायम सिंह जब तब किसी भी मंच से अखिलेश को झिड़क देते हो और अखिलेश कुछ न बोलते हो, लेकिन ये जगजाहिर है कि मुलायम सिंह अपने बेटे से बेपनाह लगाव रखते हैं, जितना कि एक पिता और बेटे में होना चाहिए। समाजवादी पार्टी के मुखिया के जन्मदिन के मौके पर पढ़िए अखिलेश के साथ उनके लगाव से जुड़े चंद किस्से.. 
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बहुत बड़ा होता है पिता का हृदय
2012 के विधानसभा चुनाव के बाद मुलायम सिंह पर मुख्यमंत्री बनने का दबाव था। लोग अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध कर रहे थे, लेकिन मुलायम ने अपने बेटे को यूपी की कुर्सी पर बिठाया। और अब हालिया समय में जब सारे गुटों ने अलगाव की रेखाएं खींच दी, समाजवादी पार्टी टूटने की कगार पर थी और अखिलेश इस झगड़े का एक पक्ष थे। तब भी मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे से इस्तीफा नहीं मांगा, जबकि कतरा-कतरा जोड़कर बनाई पार्टी दांव पर थी। 

पिता की सबसे बड़ी चिंता, बेटे को कुछ न हो जाए!
1982 का समय था। मुलायम सिंह अपने बेटे को लेकर सड़क के रास्ते ग्वालियर जा रहे थे, जहां उनका एडमिशन प्रतिष्ठित सिंधिया कॉलेज में होना था। अचानक उनकी गाड़ी रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। किसी को चोट नहीं आई थी। मुलायम ने अपने बगल में बैठे साथी से कहा, 'यार, मेरा केवल एक बेटा है वो भी अकेले यात्राएं करता हैं। अगर उसे कुछ हो गया तो?' मुलायम ने कुछ देर सोचा फिर ड्राइवर से कहा, गाड़ी वापस करो, मुझे टीपू को यहां इतनी दूर नहीं पढ़ाना। 
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इस अनुराग की बड़ी वजह..

फाइल फोटोः मुलायम और अखिलेश - फोटो : India Today
पत्नी मालती देवी की हृदयाघात से मौत के बाद अखिलेश की किशोरावस्था उनके दादी के सानिध्य में गुजरा। मुलायम के अखिलेश के प्रति अनुराग की एक बड़ी वजह ये भी है। अखिलेश और मुलायम सैफई में उस स्थान पर नियमित जाते हैं जहां उनका (मालती देवी) अंतिम संस्कार किया गया था। यह सच है कि दूसरी शादी के बावजूद मुलायम सिंह अपनी पहली पत्नी की स्मृतियों से मुक्त नहीं हो पाएं हैं। 

मुलायम का भाई प्रेम, चाचा की छाया में भतीजा
इटावा के सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाई के दौरान चाचा राजपाल सिंह अखिलेश को साइकिल से स्कूल ले जाया करते थे, तो शिवपाल थे जो अखिलेश के पेड़ पर चढ़ जाने और फिर नीचे न उतरने की जिद को मिठाइयां लाकर पूरा करते थे। शिवपाल ने ही अखिलेश को समाजवादी राजनीति का ककहरा पढ़ाने में अहम भूमिका अदा की है। 
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