एक चीनी अखबार में सोमवार को छपे लेख के अनुसार पाकिस्तान को एहसास होना चाहिए कि कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को हवा देकर उसका मकसद पूरा नहीं हो सकता है। साथ ही यह भी रेखांकित किया कि भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में विवाद को खत्म करने के लिए सुलह करना चाहिए।
ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष प्रत्येक देश के विकास में रुकावट है। पाकिस्तान सरकार, सेना और अन्य संगठनों को यह एहसास होना चाहिए कि सैन्य संघर्ष और आतंकी हमलों से कश्मीर की अराजक स्थिति बदल नहीं जाएगी और हताशा में लोग जीते रहेंगे। टकराव के दशकों बाद यह समय है कि दोनों पक्ष कुछ सुलह का रास्ता अख्तियार करें। लेख में यह भी दावा किया गया है कि स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान की चर्चा से इस अशांत क्षेत्र में भारत के कथित संलिप्तता के बारे में पाकिस्तान के आरोप साबित होते हैं।
अराजक पाकिस्तान चरमपंथ के लिए बड़ा केंद्र बन जाएगा
फाइल फोटोः PM मोदी
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रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने भारत पर अपने बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी गतिविधियों का समर्थन करने का आरोप लगाया है, जिसे भारत नकारता रहा है। लेकिन इस साल मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया, जो वास्तव में पाकिस्तान के आरोपों को साबित कर दिया है। इससे यह संकेत है कि भारत सरकार भारत नियंत्रित कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित भारत विरोधी बलों से निपटने के लिए इस प्रांत को दूसरा युद्ध मैदान बनाना चाहती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर वास्तव में बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होता है तो पाकिस्तान सरकार को देश पर से उसका नियंत्रण खत्म हो जाएगा और देश के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। एक अराजक पाकिस्तान चरमपंथ के लिए बड़ा केंद्र बन जाएगा, जिससे निपटने के लिए भारत को कठिन मुश्किलों को सामना करना पड़ेगा। इससे भारत में भी अलगाववाद भड़क सकता है। खासतौर पर उन राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में, जहां मुस्लिम आबादी बहुमत में हैं। इसमें यह भी कहा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष पड़ोसी देशों को भी प्रभावित कर रहा है।