फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिस रास्ते को बनवाने में शहीद हुए मुकुल, वहीं से भागे कब्जाधारी

Wed, 08 Jun 2016 04:18 AM IST
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
मुकुल द्विवेदी का प्लान बगैर खून-खराबा के बाग को खाली कराने का था। - फोटो : Getty Images
विज्ञापन
मथुरा के जवाहर बाग के खूनी संग्राम में जीवित बचे कब्जाधारी जब भी दो जून की शाम के उस खौफनाक मंजर को याद करेंगे तो उन्हें शहीद मुकुल द्विवेदी फरिश्ते की तरह नजर आएंगे।
विज्ञापन


अगर मुकुल ने बाग की सात फुट ऊंची दीवार तुड़वाकर रास्ता न बनवाया होता तो शायद और भी कई कब्जाधारियों की जान चली जाती। इसके सिवाय बचकर भागने का कोई रास्ता जो नहीं था। इस दीवार के गिरते ही क्रूर कब्जाधारियों ने उन्हें बेदर्दी से मार डाला था। इसके बाद उनके कातिल भी इसी रास्ते से भागे। पुलिस अब उनकी रात-दिन तलाश कर रही है।

सीनियर फोरेंसिक साइंटिस्ट गीता रानी के नेतृत्व में आगरा की फील्ड यूनिट जवाहरबाग के क्राइम सीन का अध्ययन कर लौटी है। अब इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। फील्ड यूनिट से जुड़े सूत्रों ने बताया कि खूनी संग्राम दीवार टूटते ही शुरू हो गया। उधर, पुलिस सूत्रों का कहना है कि एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी का प्लान बगैर खून-खराबा के बाग को खाली कराने का था।
विज्ञापन


वे दीवार तुड़वाकर कब्जाधारियों के लिए भागने का रास्ता बनवा रहे थे। कब्जाधारियों को लगा कि ढाई साल से चला आ रहा उनका कब्जा हट जाएगा। इसी आशंका में उन्होंने हमला बोल दिया। मुकुल को सिर कुचलकर मारा गया था। इसके बाद पुलिस हरकत में आई तो कब्जाधारी भागे। मेन गेट पर पुलिस थी। यहां आग भी लगी थी। इसके अलावा पूरे बाग की चारदीवारी है। एक ओर पुलिसवालों के आवास हैं। दूसरी तरफ आर्मी के क्वार्टर। तीसरी तरफ पुलिस लाइन। मेन गेट पर ही एसपी सिटी का ऑफिस था।

रामवृक्ष यादव ने जगह-जगह आग लगा दी थी। कब्जाधारियों के पास बचकर भागने का सिर्फ एक ही रास्ता बचा। यह वही था जो मुकुल द्विवेदी ने तैयार कराया था। इसी से होकर उनके कातिल भागे। फील्ड यूनिट को कब्जाधारियों की तमाम चप्पल-जूते इसी रास्ते पर पड़े मिले, जो भागते समय छूट गए थे।
Trending Videos
विज्ञापन

राख में नहीं मिलीं हड्डियां

झोपड़ियां हो गई थीं राख - फोटो : अमर उजाला
फील्ड यूनिट को जवाहरबाग में जगह जगह आग लगी मिली। इसमें जलकर कई कब्जाधारी मरे। माना जा रहा था कि इसकी राख में उनकी हड्डियां मिल सकती हैं। लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला।

मेन गेट से रामवृक्ष के दफ्तर तक आग
क्राइम सीन अनैलिसिस में पाया गया कि मेन गेट से लेकर रामवृक्ष के दफ्तर तक 10 जगह आग लगी थी। इस बीच 50 झोंपड़ियां थी, जो राख के ढेर में तबदील हो गईं।

700 गैस सिलेंडर थे बाग में
यह भी पाया गया कि बाग में करीब 700 गैस सिलेंडर थे। इसमें पूरा मार्केट बना था। सैलून खुला था। अवैध असलाह के अलावा पेट्रोल और देसी बम भी थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें