असम-मेघालय सीमा पर बीते महीने हुई हिंसा मामले में दोनों राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बयानबाजी जारी है। दरअसल, मुकरोह पुलिस फायरिंग को लेकर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार यानी आज विधानसभा में कहा कि हिंसा के दौरान मुकरोह पुलिस ने अपनी आत्मरक्षा और सरकारी संपत्तियों की रक्षा के लिए फायरिंग की थी। उनके इसी बयान पर मेघालय के डिप्टी सीएम ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरमा ने जो कहा वह सच हो यह जरूरी नहीं है।
मेघालय के डिप्टी सीएम ने किया पलटवार
असम सीएम के बयान पर मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि असम के सीएम हिमंत सरमा ने जो कहा जरूरी नहीं कि वह सच हो। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि असम सीएम द्वारा विधानसभा के अंदर दिया गया बयान और इससे पहले दिए गए उनके भाषणों में अंतर है। उनके बयानों में समानता नहीं है। सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मेघालय के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरी नहीं कि यह सच्चाई हो। उस स्थिति का निष्पक्ष आकलन जिसने कई लोगों की जान ले ली थी, सच्चाई का खुलासा कर देगी। तिनसोंग ने शिलांग कहा कि मेघालय सरकार एक केंद्रीय एजेंसी और हिंसा की जांच करने वाले एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
उन्होंने कहा, "सदन के बाहर, असम के मुख्यमंत्री ने हिंसा में शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और उचित कार्रवाई की है। आज सदन के अंदर उनका बयान एक अलग कहानी है।
विधानसभा में क्या बोले थे असम सीएम
असम सीएम ने विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मेघालय के साथ सटी सीमा पर असम के वन अधिकारी पर हमला किया गया और उन्हें मार डाला गया। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए फायरिंग की, जिसमें मेघालय के पांच लोगों की मौत हो गई थी। मामले में न्यायिक जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
मेघालय के मुख्यमंत्री ने दिया था यह बयान
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने इस मामले में 20 दिसंबर को प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि मुकरोह गांव में हुई हिंसा को टाला जा सकता था। अगर दोनों राज्य सरकारों की सभी एजेंसियों ने ''उचित समन्वय और संचार'' बनाए रखा होता।
लकड़ी तस्करों की रिहाई की कर रहे थे मांग
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, पड़ोसी राज्य मेघालय से आए लोगों ने असम के सुरक्षा कर्मियों को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। वे गिरफ्तार तीन लकड़ी तस्करों की रिहाई की मांग कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस को आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ीं।
मेघालय के उपद्रवी दे रहे कानून व्यवस्था को चुनौती
विधानसभा में असम सीएम ने कहा, मेघालय के उपद्रवी अक्सर अंतर-राज्यीय सीमा पर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं और निर्दोष लोगों के जीवन और संपत्ति को खतरे में डाल रहे हैं। हालांकि, सरमा ने कहा कि असम पुलिस इलाके में कड़ी निगरानी रख रही है। मेघालय के अधिकारियों के साथ समन्वय में है।
क्या था मामला
दरअसल, घटना बीते 22 नवंबर को हुई थी। जब, लकड़ी ले जा रहे एक ट्रक को पुलिस द्वारा रोकने के बाद हिंसा भड़की। इस दौरान दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में मेघालय के पांच निवासियों और असम के एक वन रक्षक सहित छह लोगों की मौत हो गई थी।