महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी एमपीएससी की ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप बी स्क्रीनिंग परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में दो परीक्षा अभ्यर्थी और दो बिचौलिए शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में अब तक 11 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि दो अभ्यर्थियों की पहचान सांगली निवासी साजिद सांडें और बुलढाणा निवासी विजय किंगर के रूप में हुई है। इनके अलावा नवी मुंबई निवासी बिचौलियों संदीप खलाटे और भैरवनाथ कदम को भी गुरुवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, साजिद सांडें और विजय किंगर पर प्रश्नपत्र अवैध तरीके से हासिल करने का आरोप है।
सातवीं रैंक हासिल करने वाली अभ्यर्थी भी गिरफ्तार
इससे पहले क्राइम ब्रांच ने नंदुरबार से ऋतुजा पाटिल को हिरासत में लिया था। उन्होंने 22 मार्च को एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर स्क्रीनिंग परीक्षा दी थी और अस्थायी मेरिट सूची में सातवीं रैंक हासिल की थी। पुलिस का आरोप है कि ऋतुजा पाटिल को लीक हुआ प्रश्नपत्र मिला था।
कथित तौर पर उन्हें सलाह दी गई थी कि संदेह से बचने के लिए वह 10 सवालों के जवाब जानबूझकर गलत दें। पाटिल की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच ने छह अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एमपीएससी के तीन अधिकारी भी शामिल थे।
प्रश्नपत्र पहले हासिल कर अलग सेट तैयार करने का आरोप
क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपियों ने परीक्षा से पहले प्रश्नों तक कथित तौर पर पहुंच हासिल की। इसके बाद उन्हें एक अलग प्रश्नपत्र के रूप में तैयार किया गया और अनधिकृत लोगों तक पहुंचाया गया। चार नई गिरफ्तारियों के बाद इस मामले में हिरासत में लिए गए आरोपियों की कुल संख्या 11 हो गई है।
ड्रग इंस्पेक्टर पदों के लिए हुई थी परीक्षा
यह परीक्षा महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए के तहत ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप बी के पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। कथित गड़बड़ी की प्रारंभिक जांच के बाद एमपीएससी ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी। आयोग ने घोषणा की कि इसके लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।
आयोग ने कहा कि सभी अभ्यर्थियों को निष्पक्ष और समान अवसर देने तथा भर्ती प्रक्रिया में उनका भरोसा बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था। आयोग ने परीक्षा की ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
सख्त गोपनीयता के बीच तैयार हुए थे प्रश्नपत्र
पुलिस के मुताबिक, परीक्षा के प्रश्नपत्र विशेषज्ञों की ओर से सख्त गोपनीयता प्रोटोकॉल के तहत तैयार किए गए थे। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार रोकथाम अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश और लोक सेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार समेत विभिन्न आरोपों के तहत कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।