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MP Politics: हार के बाद भी क्यों रेस से बाहर नहीं हुए नरोत्तम मिश्रा, ये जिम्मेदारी सौंप सकता है भाजपा आलाकमान

राहुल संपाल
Updated Tue, 05 Dec 2023 04:38 PM IST

सार

चुनाव हारने के बाद डॉ. मिश्रा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वे अपने कार्यकर्ताओं के बीच शायरी करते हुए नजर आ रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा अपनी हार पर कहते हैं, 'इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर, तेरी जीत से ज्यादा चर्चे मेरी हार के हैं।'
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MP Politics: Narottam Mishra - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया से पहले ग्वालियर जिले की डबरा सीट से भी चुनाव लड़ा है और जीत हासिल की है। लेकिन बाद में वो दतिया सीट से चुनाव लड़ने लगे। दतिया और दिमनी के बीच 140 किमी की दूरी है। मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। अगर भाजपा मिश्रा को दिमनी से टिकट देती है, तो वहां सोशल इंजीनियरिंग दुरुस्त करने में बड़ी मदद मिल सकती है। ठाकुर के साथ-साथ ब्राह्मण समाज को भी अपने पाले में किया जा सकता है। इसके लिए नरोत्तम पर बड़ी चुनौती रहेगी। लेकिन, उनके राजनीतिक अनुभव और प्रभाव का इस्तेमाल भी पार्टी के लिए काम आ सकता है। लेकिन नरोत्तम को दिमनी में थोड़ी मेहनत और मशक्कत जरूर करनी पड़ेगी। मतदाताओं का भरोसा जीतना और नरेंद्र सिंह तोमर के साथ कदमताल करके चलने की रणनीति पर भी काम करना होगा। नरेंद्र सिंह तोमर की मदद से मिश्रा की राह आसान भी हो सकती है।

शाह के करीबियों में होती है मिश्रा की गिनती

सियासी जानकारों का कहना है कि पार्टी आलाकमान डॉ. नरोत्तम मिश्रा के अनुभव का हर हाल में फायदा उठाना चाहेगी। लेकिन, मध्यप्रदेश में उच्च सदन यानी विधान परिषद (एमएलसी) नहीं है। ऐसे में सदन तक पहुंचने के लिए सिर्फ विधानसभा का चुनाव लड़ना ही एकमात्र उपाय है। इसलिए उनकी हार के बाद उप चुनाव लड़ने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। नरोत्तम ग्वालियर-चंबल इलाके से आते हैं और वहां फिलहाल एकमात्र दिमनी सीट ही ऐसी है, जहां उपचुनाव की संभावना बन सकती है। मिश्रा की गिनती केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में भी होती है। यह भी हो सकता है कि पार्टी MP Politics: हार के बाद भी क्यों रेस से बाहर नहीं हुए नरोत्तम मिश्रा, ये जिम्मेदारी सौंप सकता है भाजपा आलाकमान केंद्रीय संगठन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव जैसे पद पर काबिज कर उनकी संगठनात्मक क्षमता का उपयोग कर सकता है। इसके अलावा मिश्रा के मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

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