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Damoh Case: फर्जी डॉक्टर के ब्रिटिश चिकित्सक की पहचान चुराने की वजह क्या, दो बार पुलिस के चंगुल में कैसे फंसा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 10 Apr 2025 05:35 PM IST

सार

फर्जी डॉक्टर ने ब्रिटेन के नामी-गिरामी कार्डियोलॉजिस्ट की पहचान क्यों चोरी की? उसकी सही योग्यता क्या है? किस तरह उसने अलग-अलग राज्यों में अस्पतालों में फर्जी तरह से काम किया? कब-कब वह पुलिस के चंगुल में भी फंसा? इसके अलावा फर्जी डॉक्टर ने जिस ब्रिटिश चिकित्सक की पहचान चुराई, खुद उन्होंने इस पूरे मामले पर क्या कहा है? आइये जानते हैं...
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मध्य प्रदेश के दमोह में फर्जी डॉक्टर की 15 सर्जरी का हुआ खुलासा। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के दमोह में कम से कम 15 लोगों की दिल से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने और इनमें से कथित तौर पर 7 लोगों की जान लेने वाले फर्जी डॉक्टर को लेकर कई नए खुलासे हुए हैं। खुद की पहचान ब्रिटेन में प्रशिक्षित डॉक्टर एन. जॉन कैम बताने वाले इस बहरूपिये से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसे कई अहम जानकारियां मिलीं। साथ ही उसके परिवार और शिक्षा को लेकर भी कई नई चीजें पता चली हैं?

ऐसे में यह जानना अहम है कि फर्जी डॉक्टर ने ब्रिटेन के नामी-गिरामी कार्डियोलॉजिस्ट की पहचान क्यों चोरी की? उसकी सही योग्यता क्या है? किस तरह उसने अलग-अलग राज्यों में अस्पतालों में फर्जी तरह से काम किया? कब-कब वह पुलिस के चंगुल में भी फंसा? इसके अलावा फर्जी डॉक्टर ने जिस ब्रिटिश चिकित्सक की पहचान चुराई, खुद उन्होंने इस पूरे मामले पर क्या कहा है? आइये जानते हैं...


यह भी पढ़ें: MP में फर्जी डॉक्टर ने लीं सात जानें: नकली डिग्री दिखा तीन राज्यों में किए ढेरों इलाज, 20 साल बाद ऐसे खुला राज
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मध्य प्रदेश के दमोह में फर्जी डॉक्टर की 15 सर्जरी का हुआ खुलासा। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के दमोह में कम से कम 15 लोगों की दिल से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने और इनमें से कथित तौर पर 7 लोगों की जान लेने वाले फर्जी डॉक्टर को लेकर कई नए खुलासे हुए हैं। खुद की पहचान ब्रिटेन में प्रशिक्षित डॉक्टर एन. जॉन कैम बताने वाले इस बहरूपिये से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसे कई अहम जानकारियां मिलीं। साथ ही उसके परिवार और शिक्षा को लेकर भी कई नई चीजें पता चली हैं?

ऐसे में यह जानना अहम है कि फर्जी डॉक्टर ने ब्रिटेन के नामी-गिरामी कार्डियोलॉजिस्ट की पहचान क्यों चोरी की? उसकी सही योग्यता क्या है? किस तरह उसने अलग-अलग राज्यों में अस्पतालों में फर्जी तरह से काम किया? कब-कब वह पुलिस के चंगुल में भी फंसा? इसके अलावा फर्जी डॉक्टर ने जिस ब्रिटिश चिकित्सक की पहचान चुराई, खुद उन्होंने इस पूरे मामले पर क्या कहा है? आइये जानते हैं...

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फर्जी डॉक्टर की असल योग्यता क्या होने का दावा?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से दावा किया गया है कि फर्जी डॉक्टर- नरेंद्र विक्रमादित्य यादव ने पूछताछ के दौरान कहा कि उसके पास पश्चिम बंगाल की यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री है। लेकिन उसकी पुडुचेरी की यूनिवर्सिटी वाली डिग्री नकली है। उसने छेड़छाड़ के बाद इस डिग्री को तैयार करवाया।

फर्जी डॉक्टर का यह दावा चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि जहां एमबीबीएस की डिग्री किसी भी व्यक्ति को आम डॉक्टर बना सकती है, वहीं दिल या किसी विशेष वर्ग के इलाज के लिए डॉक्टर को एमडी यानी मास्टर्स डिग्री हासिल करना जरूरी होता है। सिर्फ एमबीबीएस की डिग्री डॉक्टरों के स्पेशलाइजेशन के लिए काफी नहीं होती। 

फर्जी डॉक्टर ने क्यों चुराई ब्रिटिश चिकित्सक की पहचान?
दमोह के मिशन अस्पताल में फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने वाले एन. जॉन कैम ने ब्रिटेन के लोकप्रिय कार्डियोलॉजिस्ट और प्रोफेसर जॉन कैम की पहचान चुराई थी। पुलिस के मुताबिक, उसने दावा किया है कि वह 1999 में लंदन गया और मेडिकल का कोर्स भी किया। हालांकि, इससे उसे भारत में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं मिलती। इसलिए उसने एमडी की फर्जी डिग्री बनवाई। 

इतना ही नहीं वह 1999 से ही अपना नाम ब्रिटेन के डॉक्टर जॉन कैम कराने की कोशिश में भी जुटा हुआ था। उसने कानपुर में कुछ दस्तावेज जमा किए थे, जिसमें अधिकारियों से उसके नाम को बदलने के लिए कहा गया था। हालांकि, इस पर उसने आगे जानकारी नहीं ली। फर्जी डॉक्टर से पूछताछ करने वाली दमोह एसपी कीर्ति सोमवंशी ने कहा कि आरोपी ने अपनी पहचान इसलिए बदलने की कोशिश की, ताकि उसे एक अंग्रेजों जैसा ईसाई धर्म का नाम मिल जाए और इससे उसे भारतीय समुदाय में ज्यादा सम्मान और बेहतर नौकरियों के मौके मिलते। 



चौंकाने वाली बात है कि पुलिस ने इस मामले में एक महिला को भी आरोपी बनाया था, जिसे नरेंद्र की पत्नी माना गया था। हालांकि, बाद में उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। दमोह एसपी सोमवंशी के मुताबिक, इस महिला ने कभी फर्जी डॉक्टर से शादी नहीं की थी और फिलहाल उसके ब्रिटेन में होने की बात सामने आई है। नरेंद्र विक्रमादित्य की कोई पत्नी और बच्चे नहीं हैं। उसने सिर्फ फर्जी दस्तावेजों में ही अपनी रिश्तेदारी दिखाई थी।  

  • बताया जाता है कि 2013 में आईएमए की कार्रवाई के बाद फर्जी डॉक्टर ने एक कंपनी शुरू करने की कोशिश की। हालांकि, यह योजना सफल नहीं हुई। इस बीच उसने प्रतिबंधित रहने के दौरान आधिकारिक दस्तावेजों में अपनी पहचान- जॉन कैम के तौर पर कराने की कोशिश की। 
  • इसी दौरान उसने नकली नाम के साथ अपना ट्विटर अकाउंट बनाया और उससे ट्वीट करना शुरू कर दिया। ऐसा ही एक ट्वीट उसने 2022 में योगी आदित्यनाथ को लेकर किया, जिसमें फ्रांस में हो रहे दंगों को लेकर यूपी सीएम को भेजने की बात कही गई थी। 
  • योगी के अकाउंट से इसे रिट्वीट किए जाने के बाद फर्जी डॉक्टर की लोकप्रियता काफी बढ़ी थी। हालांकि, इसी दौरान असली ब्रिटिश कार्डियोलॉजिस्ट जॉन कैम ने भी फर्जी अकाउंट को लेकर चेतावनी जारी की। 
नरेंद्र विक्रमादित्य कुछ महीने एक अस्पताल में काम करने के बाद नौकरी छोड़कर दूसरे शहर में नौकरी तलाश लेता था। यानी वह ज्यादा दिन तक किसी एक शहर में नहीं रहा। इसके चलते यह पता लगाना काफी मुश्किल है कि उसने कितने राज्यों में कितने अस्पतालों में काम किया।     

छत्तीसगढ़ के स्पीकर की मौत से जुड़े मामले में क्या खुलासा हुआ?
फर्जी डॉक्टर ने काफी समय छत्तीसगढ़ में भी काम किया। जांच में यह भी पता चला कि विक्रमादित्य यादव ने करीब 20 साल पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कई मरीजों की सर्जरी में हिस्सा लिए। 2006 में इस फर्जी डॉक्टर ने अपनी नकली पहचान- डॉक्टर एन. जॉन कैम के नाम का इस्तेमाल करते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में इलाज किया था।

शुक्ल, जो उस दौरान छत्तीसगढ़ के कोटा से विधायक थे, का निधन सर्जरी के महीने भर के अंदर हो गया था। राजेंद्र शुक्ल के बेटे प्रदीप शुक्ल ने बताया कि उनके पिता को सर्जरी के बाद 18 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। प्रदीप के मुताबिक, उनके पिता को माइल्ड हार्ट अटैक आया था। इसके बाद उनका दो घंटे तक ऑपरेशन चला। उन्हें जबरदस्ती यह मनवाया गया कि उनकी सर्जरी करना बेहद जरूरी है और इमरजेंसी में इलाज कराना जरूरी है। 

प्रदीप ने कहा, "इस सर्जरी के बाद उनके पिता बेहोश हो गए और कुछ समय बाद ही उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। मुझे लग रहा था कि सर्जरी में कुछ गड़बड़ हुई है, लेकिन पिता की उम्र भी 76 साल थी। इसलिए हमने अस्पताल का भरोसा कर लिया।" राजेंद्र शुक्ल के परिवार ने जिला प्रशासन से मामले में कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले में अस्पताल को भी नोटिस जारी किया गया है। इसी अस्पताल में फर्जी डॉक्टर ने और भी कई लोगों के इलाज किए थे। इसके बाद उसने हैदराबाद में डॉक्टर के तौर पर सेवाएं दीं। यहां तक कि उसने लंबे समय तक मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में भी खुद को डॉक्टर दिखाया और यहां मरीजों के इलाज किए।
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