देश की 600 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों का हाल
जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, वहां की 600 से अधिक विधानसभा सीटों के बारे में एक थिंक टैंक ने कुछ आंकड़े जुटाए हैं। संकलित आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पिछले कई साल से विधानसभा सत्र आहूत किए जाने में गिरावट देखी जा रही है। कार्यदिवस पर बैठक की संख्या भी लगातार कम हो रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा की बैठकें साल में औसतन 30 दिन से भी कम होती हैं।
विधानसभा की औसत बैठक कितने दिन?
पिछले कुछ वर्षों में बैठकों की संख्या कम होने के मामले में पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की एक रिपोर्ट आई है। इसके अनुसार, राजस्थान विधानसभा की वार्षिक बैठक औसतन 29 दिन और तेलंगाना विधानसभा में केवल 15 दिन होती है। 2019 से 2023 के बीच, छत्तीसगढ़ में विधानसभा की औसत बैठकें साल में 23 दिन हुईं। इन दिनों में कितनी देर कार्यवाही चली इस बारे में पीआरएस की रिपोर्ट में बताया गया कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक दिन में औसतन पांच घंटे की कार्यवाही हुई।
एक दिन में केवल पांच घंटे की कार्यवाही
पांच राज्यों के चुनाव से पहले आई रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा की बैठकें 16 दिन हुईं। एक दिन में औसतन लगभग चार घंटे कार्यवाही हुई। पूरे साल में मिजोरम विधानसभा की बैठक केवल 18 दिनों के लिए बुलाई गई। हर बैठक में लगभग पांच घंटे की कार्यवाही हुई।
कांग्रेस शासित राजस्थान सबसे आगे
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, पांचों राज्यों की तुलना करने पर राजस्थान सबसे आगे दिखता है। इस कांग्रेस शासित प्रदेश की विधानसभा में सबसे अधिक बैठकें हुईं। हर साल लगभग 29 दिन। बैठक औसतन लगभग सात घंटे लंबी चली।
लगातार घट रही है विधानसभा की बैठकें
पांच राज्यों के दीर्घकालिक डेटा के आधार पर दावा किया गया है कि चार राज्यों में समय के साथ विधानसभी सत्र और बैठकें कम हो चुकी हैं। अपने पहले 10 वर्षों में, राजस्थान विधानसभा की बैठक साल में 59 दिन होती थी, जबकि एमपी विधानसभा की बैठक साल में 48 दिन होती थी। पिछले 10 वर्षों में, औसत वार्षिक बैठक राजस्थान में घटकर 29, जबकि मध्य प्रदेश में 21 दिन रह गई है। 2017 में तेलंगाना का गठन हुआ। पहली विधानसभा में सबसे अधिक 37 दिन बैठकें हुईं। हालाँकि, इसके बाद से हर साल दिनों की संख्या घटती जा रही है। यहां अब केवल 20 दिनों की बैठक होती है।
धुआंधार तरीके से पारित हो रहे विधेयक
इन राज्यों की विधानसभाओं में लगभग 48 प्रतिशत विधेयकों पर उसी दिन या पेश होने के अगले दिन विचार किया गया। खास बात ये कि विधेयक बहुत जल्दी पारित भी कराए जा रहे हैं। मिजोरम विधानसभा के मौजूदा कार्यकाल के दौरान 57 विधेयक पारित हुए। सभी एक ही दिन या पेश होने के अगले दिन पारित हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में, छत्तीसगढ़ विधानसभा में छह घंटे की एक बैठक में 14 विधेयक पारित कराए गए। मध्य प्रदेश में, 2022 में दो दिनों में 13 विधेयक पेश और पारित हुए। दोनों बैठकें एक साथ पांच घंटे तक चलीं।
किन राज्यों में कितने अध्यादेश लाए गए
विधानसभाओं या संसद में विधेयकों पर चर्चा, संशोधनों पर मंथन जैसी लोकतांत्रिक और संसदीय गतिविधि कम होने का असर साफ तौर पर तब सामने आता है, जब इन राज्यों में सरकारें बड़ी संख्या में अध्यादेश जारी करती हैं। 2019 और 2023 के बीच, मध्य प्रदेश में 39 अध्यादेश जारी हुए। भाजपा शासित इस राज्य के बाद भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के शासन वाले प्रदेश तेलंगाना में 14 अध्यादेश आए, जबकि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 13 अध्यादेश लाए गए।
नियम-कानून के लिए विधेयकों से अधिक अध्यादेश का सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2020 में 11 अध्यादेश जारी किए गए। इस साल विधानसभा की बैठक केवल छह दिन चली। 2021 में अध्यादेशों की संख्या बढ़कर 14 हो गई। इस साल विधानसभा की बैठक 20 दिनों तक चली। बता दें कि राज्य सरकार या केंद्र अध्यादेश तब जारी करती हैं जब विधानसभाओं या संसद की बैठक नहीं हो रही हो।
उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कर सके माननीय?
विधानसभा की कार्यवाही में गिरावट के बारे में आई पीआरएस की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान विधानसभा के पूरे कार्यकाल के दौरान एक उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ। ये भी रोचक है कि मार्च 2020 में सरकार बदलने के बाद से मध्य प्रदेश विधानसभा में भी कोई डिप्टी स्पीकर नहीं है।
विधानसभाओं में लैंगिक अनुपात
विधायकों के लैंगिक अनुपात के बारे में भी इस रिपोर्ट से जानकारी मिलती है। इसके अनुसार, छत्तीसगढ़ विधानसभा में 17 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं। राजस्थान में यह अनुपात 13 फीसदी और मध्य प्रदेश में 10 फीसदी से भी कम है।
महिला और पुरुष विधायक में अधिक सक्रिय कौन?
निर्वाचन के बाद सदन में विधायक कितनी सक्रियता से भाग लेते हैं, इसके बारे में पीआरएस की रिपोर्ट में कहा गया, छत्तीसगढ़ में, महिला विधायकों की उपस्थिति 93 प्रतिशत रही। पुरुष विधायकों की उपस्थिति लगभग 88 प्रतिशत रही। मध्य प्रदेश में महिला विधायकों की उपस्थिति औसतन 79 प्रतिशत, जबकि पुरुषों की 81 प्रतिशत रही। राजस्थान में महिला विधायकों की औसतन उपस्थिति 77 प्रतिशत और पुरुषों की 82 प्रतिशत रही। सदन की कार्यवाही के दौरान कौन सदस्य कितनी सक्रियता से बहस में भाग लेता है? इस सवाल पर राजस्थान विधानसभा में पुरुष और महिला सदस्यों की औसत भागीदारी लगभग बराबर होने की बात सामने आई है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का एलान
गौरतलब है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने सोमवार को पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा करते हुए कार्यक्रम का एलान कर दिया। 7 से 30 नवंबर के बीच होने वाले विधानसभा चुनाव कार्यक्रम के अनुसार केवल छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराए जाएंगे। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर, राजस्थान में 23 नवंबर, तेलंगाना में 30 नवंबर और मिजोरम में 7 नवंबर को एक चरण में विधानसभा चुनाव होंगे। छत्तीसगढ़ में 7 नवंबर (20 सीटें) और 17 नवंबर (70 सीटें) को दो चरणों में मतदान होगा। चुनाव के नतीजे तीन दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।