डिजिटल इंडिया अभियान के तहत नागरिकों को जारी किए जाने वाले प्रमाण-पत्र इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में मुहैया कराने देश के आधे से अधिक राज्य पूरी तरह विफल रहे हैं। गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर के सात राज्यों समेत का प्रदर्शन एक प्रतिशत से भी कम रहा है।
केंद्र ने जन्म-मृत्यु, शिक्षा, जाति, विवाह, आय, नागरिक आपूर्ति समेत विभिन्न सेवाओं में डिजिटल प्रमाण-पत्र मुहैया कराना तीन साल पहले शुरू की गई योजना के तहत तय किया था। हालांकि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड और आंध्र प्रदेश ने कई सौ करोड़ प्रमाण-पत्र इलेक्ट्रॉनिक फार्म में नागरिकों को जारी किए हैं।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और सीबीएसई समेत विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों तथा विभागों द्वारा अब तक कुल 287.13 करोड़ से अधिक प्रमाण-पत्र जारी किए गए। इनमें सबसे बड़ी तादाद आधार की है जो अब तक 119.08 करोड़ नागरिकों को जारी किए गए हैं।
जबकि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 4574.37 करोड़ प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं। इसमें सर्वाधिक महाराष्ट्र द्वारा 1285.07 लाख, उत्तर प्रदेश द्वारा 1001.23 लाख, कर्नाटक द्वारा 737.96 लाख, ओडिसा द्वार 335 लाख, झारखंड द्वारा 260.14 लाख और मध्य प्रदेश ने 236.27 लाख प्रमाण-पत्र जारी किए हैं। यूपी ने हालांकि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और राजस्व संबंधी एक भी पत्र नहीं जारी किया है।
इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय लगातार डिजिटल इंडिया अभियान को लेकर राज्यों के संपर्क में रहता है। लेकिन इसके बावजूद तमाम राज्यों द्वारा एक भी प्रमाण पत्र डिजिटल फार्म में नागिरकों को नहीं जारी किया गया। यहां तक कि विकास का रोल-मॉडल कहे जाने वाले गुजरात में सिर्फ 1241 डिजिटल प्रमाण-पत्र सामान्य सेवा पोर्टल द्वारा जारी किए गए। जबकि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मणिपुर, सिक्किम और मेघालय में एक भी डिजिटल प्रमाण-पत्र नहीं जारी हुआ।
केंद्र शासित प्रदेशों में लक्षद्वीप, पुडुचेरी, दादरा नागर हवेली और अंडमान-निकोबार में भी यही हाल है। औसत प्रदर्शन करने वाले राज्यों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, चंडीगढ़, गोवा, पंजाब, तेलंगाना, बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम और केरल रहे हैं। जहां से सात लाख से 90 लाख तक प्रमाण-पत्र जारी किए गए।
याद रहे कि सरकार द्वारा इस अभियान के तहत 2019 तक पूरे भारत में डिजिटल सुविधाएं प्रदान करने की योजना बनाई है। इसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है और इसका मकसद बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है।
डिजिटल इंडिया के तीन कोर घटक हैं। इसमें डिजिटल आधारभूत ढाँचे का निर्माण करना, इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को जनता तक पहुंचाना और डिजिटल साक्षरता है। केंद्र सरकार इस योजना के तहत 2019 तक नागरिकों को डिजिटल सेवाएं मुहैया कराने का लक्ष्य है। लेकिन राज्यों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र संतुष्ट नहीं है। माना जास रहा है कि आईटी मंत्रालय आने वाले दिनों में राज्यों के लिए इस मामले में लक्ष्य निर्धारित करेगा।