दुनिया की तुलना में देश की सड़कों पर काफी अधिक दुर्घटना के आंकड़ों के बीच सरकार ने एक और चौंकाने वाली जानकारी सार्वजनिक की है। आंकड़ों के अनुसार देश में हर तीसरा ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी है। इस तरह करीब पांच करोड़ से अधिक लोग फर्जी लाइसेंस के साथ सड़कों पर बेखौफ वाहन दौड़ा रहे हैं।
हालांकि, जल्द ही फर्जी लाइसेंस के साथ वाहन चलाने वालों पर नकेल कसने के लिए सरकार विधेयक लाने जा रही है। इसके तहत फर्जी लाइसेंस के साथ वाहन चलाने पर एक साल तक जेल और 10 हजार रुपये का भारी जुर्माना हो सकता है। वर्तमान में 500 रुपये जुर्माना और तीन माह की जेल का प्रावधान है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार इस विधेयक में नाबालिगों के वाहन चलाने पर लगाम लगाने के लिए कड़ा प्रावधान करने जा रही है। प्रस्तावित विधेयक में वाहन के मालिक या ड्राइवर के अभिभाव को तीन साल तक की जेल और 20 हजार रुपये तक का जुर्माना देना होगा।
इसके साथ ही वाहन का पंजीकरण भी रद्द किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में 30 फीसदी ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी हैं। हमें इसकी जांच करने की जरूरत है। हम ऑनलाइन सिस्टम शुरू करने जा रहे हैं जहां कंप्यूटराइज्ड टेस्ट के जरिये ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया जा सकेगा।
हर कोई, चाहे वह राजनेता हो, अधिकारी हो या कोई बड़ा आदमी उसे लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट देना होगा। इस मामले में पूरी पारदर्शिता अपनाई जाएगी।
गडकरी ने उम्मीद जताई कि यह विधेयक अगले सत्र में पारित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विषय समवर्ती सूची में आता है और राज्य कानून में बदलाव पर सहमत हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक में देरी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से जुड़े लोगों के विरोध के कारण हो रही है।
वे पारदर्शिता और कंप्यूटरीकरण के खिलाफ हैं। राजस्थान के परिवहन मंत्री यूनुस खान की अध्यक्षता में बनाए गए एक मंत्री समूह ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने की सिफारिश की है।