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मुलायम-अजित मिले तो भाजपा और बसपा को मिलेगी कड़ी चुनौती!

Mon, 30 May 2016 08:46 AM IST
शादाब रिज़वी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुलायम और अजित सिंह - फोटो : Getty
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कहते हैं सियासत में कोई स्थायी दोस्त और दुश्मन नहीं होता। सियासत में बर्चस्व को लेकर जुदा हुए रालोद मुखिया अजित सिंह और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव में फिर दोस्ती की पीग बढ़ी है। दोनों पहले दोस्त फिर दुश्मन और अब फिर दोस्त बनने की राह पर चल निकले हैं।  27 साल में दोनों के बीच सियासी दोस्ती और दुश्मनी चलती रही है। दोनों दलों में दोस्ती होने पर यूपी खासकर पश्चिमी यूपी में सियासी तस्वीर का बदलना तय है। इससे भाजपा और बसपा को कड़ी चुनौती खड़ी होगी। चौधरी चरण सिंह का कुनबा भी फिर से एक हो जाएगा। 
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पूर्व प्रधानंमंत्री चौधरी चरण सिंह की सियासी विरासत को लेकर मुलायम सिंह और अजित सिंह केबीच पुरानी आदावत है। अजित सिंह खुद को उनका बेटा होने के कारण असल वारिस बताते रहे हैं,  मुलायम सिंह कर्म के आधार पर खुद केवारिस होने का दावा करते  हैं। 1989 में यूपी में जनता दल की सरकार गठन के वक्त सीएम बनने को लेकर दोनों आमने सामने आ गए थे।

आखिर में  तत्कालीन पीएम वीपी सिंह के हस्तक्षेप से विधायक दल की मीटिंग बुलाई और वोटिंग कराई।  अजित की जगह विधायकों ने मुलायम सिंह को नेता और चुने और  वह सीएम बन गए। उसके बाद अजित सिंह अलग हो गए। सीएम की कुर्सी नहीं मिलने से खफा अजित सिंह ने 2002 में मुलायम सिंह से बदला लिया। उन्होंने भाजपा और बसपा के साथ मिलकर सूबे में सरकार बनवा दी। अजित के दांव से मुलायम चित हो गए और सरकार नहीं बना सके।
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2007 में छोटे चौधरी ने नेताजी का साथ छोड़

बदल सकती है यूपी की सियासी तस्वीर - फोटो : Getty
चौधरी चरण सिंह के अनुयाइयों ने बाद में मुलायम सिंह और अजित को एक साथ लाने की कोशिश की, जिसमें उन्हें कामयाबी मिली। दरअसल, 2003 में अजित सिंह तेलंगाना राज्य की मांग के आंदोलन में शामिल होने वहां चले गए।

राजनातिक दोस्त भाजपा ने इसपर एतराज जताया। अलग राज्य की मांग को लगातर धार देने वाले अजित सिंह ने भाजपा और  बसपा की सरकार को दिया समर्थन वापस ले लिया और कभी सियासी दुश्मन माने जाने वाले  मुलायम सिंह से दोस्ती कर उनकी सरकार बनवा दी। रालोद भी सरकार में शामिल हुआ। दोनों की दोस्ती 2007 के आम चुनाव से पहले फिर दरक गई। छोटे चौधरी ने नेताजी का साथ छोड़ दिया।

इस बिखराव का फायदा बसपा को मिला और बहन मायावती सीएम बन गई। 2012 में अजित सिंह कांग्रेस के साथ चुनाव मैदान में उतरे। अब 2017 में एक बार फिर पुराने सियासी विरोधी मुलायम सिंह से दोस्ती की गाथा लिख रहे हैं।  अब दोस्ती फिर परवान चढ़ेगी , यह समय ही तय करेगा। 
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