मेहसाणा, कड़ी, कलोल और हिम्मतनगर में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां भी प्लास्टिक, वस्त्र और इंजीनियरिंग जैसे उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों ने गुजरात छोड़ना शुरू कर दिया है।
मेहसाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के सचिव चिराग पटेल ने बताया कि मेहसाणा औद्योगिक क्षेत्र की 285 इकाइयों में 3000 से ज्यादा श्रमिक काम करते हैं। इनमें से अधिकतर बिहार-यूपी जैसे हिंदी भाषी क्षेत्रों से हैं, लेकिन हमलों के डर से अब वो धीरे-धीरे गुजरात छोड़कर जा रहे हैं। 400 से ज्यादा लोग तो डर की वजह से पहले ही पलायन कर चुके हैं।
श्रमिकों की भारी कमी की वजह से राज्य की कई फैक्ट्रियों का काम ठप हो गया है। डर के मारे लोग या तो अपने-अपने राज्यों को पलायन कर चुके हैं या कहीं छुपे हुए हैं। कई फैक्ट्रियों के मालिकों ने इस समस्या से जल्द निजात पाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। सरकार का कहना है कि जल्द ही स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा।