पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी नगर पालिका और गुजरात सरकार को फटकार लगाई थी। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की बेंच ने मोरबी पुल हादसे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कहा था कि पीड़ितों और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को दिया जा रहा मुआवजा बहुत कम है।
गुजरात के मोरबी में भयंकर पुल हादसे (Morbi bridge collapse) के मामले में सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High court) में मोरबी नगर पालिका और राज्य सरकार ने हलफनामा पेश किया। राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में मृतकों के परिजनों और घायलों को दिए जाने वाले मुआवजे के बारे में जानकारी दी है।
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गुजरात सरकार की ओर से पेश किए गए हलफनामे में कहा गया है कि पुल गिरने की इस घटना में मृतकों के परिवारों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने बताया कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को कुल 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही इस घटना में घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
इस मामले में पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी नगर पालिका और गुजरात सरकार को फटकार लगाई थी। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की बेंच ने मोरबी पुल हादसे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कहा था कि पीड़ितों और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को दिया जा रहा मुआवजा बहुत कम है।
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इसके अलावा हाईकोर्ट ने भूपेंद्र सरकार को राज्य के सभी पुलों का सर्वेक्षण करने का आदेश भी दिया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि यह सुनिश्चित करें कि कितने पुल उचित स्थिति में हैं?