गुजरात के मोरबी शहर में हुए पुल हादसे पर विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट सामने आई है। हाईकोर्ट में दायर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे का कारण ओरेवा कंपनी प्रबंधन की "गंभीर परिचालन और तकनीकी खामियां" है। बता दें कि पिछले साल गुजरात के मोरबी शहर में पुल हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी। इस भीषण हादसे में 56 लोगों की मौत हुई थी।
कंपनी का रवैया बर्दाश्त के काबिल नहीं
मंगलवार को गुजरात हाई कोर्ट में दायर रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा कि ओरेवा कंपनी के प्रबंधन का दृष्टिकोण उदासीन रहा। एसआईटी ने मोरबी को "सबसे गंभीर और दुखद मानवीय आपदाओं में से एक" करार दिया और कहा कि कंपनी प्रबंधन के ऐसे रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
हादसे में 135 लोगों ने गंवाई जान
रिपोर्ट में कहा गया है, हादसे के लिए प्रथम दृष्टया प्रबंध निदेशक और दो प्रबंधकों सहित कंपनी का पूरा प्रबंधन जिम्मेदार लगता है। बता दें कि मोरबी में मच्छू नदी पर ब्रिटिश काल का झूला पुल पिछले साल 30 अक्टूबर को ढह गया था। इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 56 लोग घायल हुए थे।
पुल में डिजाइन से जुड़ी खामियां
एसआईटी ने कहा कि मोरबी नगरपालिका ने पुल की मरम्मत का काम ओरेवा कंपनी को दिया। "गैर-सक्षम एजेंसी" ने पुल की देखरेख का काम "तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह के बिना" किया। पुल के नवीनीकरण के बाद डिजाइन से जुड़े दोष भी पाए गए। एसआईटी की जांच में डिजाइन से जुड़ी खामियों को भी पुल ढहने का एक कारण माना गया है।
कंपनी तकनीकी रूप से अक्षम
विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि मोरबी पुल त्रासदी सरकारी मानदंडों के अनुसार उचित प्रक्रिया का पालन करने में प्रशासनिक स्तर पर चूक का परिणाम थी। एसआईटी का आरोप है कि पुल की मरम्मत करने और इसे जनता के लिए खोलने से पहले कंपनी इसका परीक्षण करने में तकनीकी रूप से अक्षम रही।
पेशेवरों की मदद नहीं ली गई
गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी मायी की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हो रही है। मोरबी पुल त्रासदी पर हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसी पीठ के समझ एसआईटी की रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर कंपनी ने क्षेत्र में एक पेशेवर विशेषज्ञ एजेंसी की मदद ली होती तो पुल की मरम्मत को पूरा करने के लिए उठाए गए अलग-अलग कदमों से बचा जा सकता था।"
जनता के लिए खोलने से पहले फिटनेस रिपोर्ट नहीं ली
एसआईटी की रिपोर्ट महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने पेश की। इसमें कहा गया कि पुल को आम जनता के लिए खोलने से पहले, ओरेवा कंपनी को इसकी फिटनेस रिपोर्ट हासिल करनी चाहिए थी। इस संबंध में नगर पालिका से परामर्श भी करना चाहिए था। पुल के रखरखाव और संचालन के संबंध में ओरेवा समूह और मोरबी नगर पालिका के बीच अनुबंध नवीनीकृत हुए थे।
पर्यटकों की संख्या और टिकटों पर कोई लगाम नहीं
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि कंपनी प्रमुख मरम्मत करने के लिए देव प्रकाश सॉल्यूशंस को अनुबंध देने से पहले, विशेषज्ञ एजेंसी की तकनीकी राय लेने में नाकाम रहे। किसी निश्चित समय पर पुल तक पहुंचने वाले व्यक्तियों की संख्या या टिकटों की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
पुल की जर्जर स्थिति, अधिकारियों ने नहीं लिया एक्शन
एसआईटी जांच के दौरान ओरेवा समूह ने सफाई में कहा कि उसने स्थानीय अधिकारियों के साथ मोरबी पुल के रखरखाव और संचालन के लिए एमओयू समाप्त होने के बाद अधिकारियों को जानकारी दी। कंपनी के अनुसार, पुल की जर्जर स्थिति के बारे में संबंधित अधिकारियों को कई पत्र भेजे गए।
शुल्क बढ़ाने से इनकार,सुधारात्मक कार्रवाई नहीं कर सकी कंपनी
कंपनी का दावा है कि अधिकारियों से उपयोगकर्ता शुल्क बढ़ाने का भी अनुरोध किया था जिसे संबंधित अधिकारियों ने खारिज कर दिया था। अधिकारियों ने कंपनी से कहा, या तो पहले से चले आ रहे उपयोगकर्ता शुल्क पर काम जारी रखें या पुल का कब्जा उन्हें वापस कर दें। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी पुल को संबंधित अधिकारियों को सौंपने में विफल रही। इसके अलावा कंपनी पुल की स्थिति में सुधार के लिए कोई सुधारात्मक कार्रवाई भी नहीं कर सकी।
ओरेवा कंपनी प्रबंधन की गंभीर खामियां
एसआईटी ने कहा कि मोरबी नगरपालिका ने पुल की मरम्मत का काम ओरेवा कंपनी को दिया। ओरेवा ने इसे एक "गैर-सक्षम एजेंसी" को सौंप दिया। तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह नहीं ली गई। एसआईटी की टिप्पणियों के आधार पर, स्पष्ट है कि ओरेवा कंपनी के प्रबंधन की ओर से गंभीर परिचालन और तकनीकी खामियां थीं।"
नगरपालिका के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगे
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, नगर पालिका के तीन सदस्यों - तत्कालीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कार्यकारी समिति के अध्यक्ष की ओर से भी गलतियां हुईं। प्रबंधन, रखरखाव और संचालन के लिए कंपनी की तरफ से साइन किए गए एमओयू को लागू करने में विफल रहे।