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मोरबी पुल त्रासदी: 'पीड़ितों को अंतरिम मुआवजे का 50 फीसदी किया जमा', ओरेवा समूह ने गुजरात हाईकोर्ट को बताया

Mon, 27 Mar 2023 11:08 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

ओरेवा ग्रुप (अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) मोरबी में मच्छू नदी पर बने ब्रिटिश कालीन पुल के संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार था। यह पुल पिछले साल 30 अक्तूबर को ढह गया था। इसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी।
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मोरबी पुल हादसा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ओरेवा समूह ने मोरबी केबल पुल दुर्घटना के पीड़ितों के लिए 14 मार्च को अंतरिम मुआवजे की राशि का 50 फीसदी जमा कर दिया है। बाकी का भुगतान 11 अप्रैल या उससे पहले किया जाएगा। यह जानकारी कंपनी ने गुजरात हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एजे देसाई और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की खंडपीठ को सोमवार को दी।

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ओरेवा ग्रुप (अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) मोरबी में मच्छू नदी पर बने ब्रिटिश कालीन पुल के संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार था। यह पुल पिछले साल 30 अक्तूबर को ढह गया था। इसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी और 56 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हाईकोर्ट त्रासदी पर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है। अदालत ने सोमवार को समूह के हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया और कंपनी को शेष राशि जमा करने के लिए समय दे दिया। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

यह भी पढ़ें: Morbi Bridge Collapse: ओरेवा कंपनी के MD की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, जानें पूरा मामला
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135 लोगों की गई थी जान
गौरतलब है कि मोरबी शहर में मच्छु नदी पर बना पुलिस बीते साल तीस अक्तूबर को ढह गया था। इस हादसे में 135 लोगों की जान चली गई थी। जबकि 56 अन्य घायल हो गए थे। अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड (ओरेवा ग्रुप) ने पिछले साल त्रासदी के बाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अंतरिम मुआवजे का आश्वासन दिया था। 

10 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार 
मोरबी पुलिस पहले ही ओरेवा ग्रुप के एमडी जयसुख पटेल सहित दस आरोपियों को आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 336 (मानव जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य), 337 (चोट पहुंचाना) और और 338 के तहत गिरफ्तार कर चुकी है।
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गौरतलब है कि मोरबी नगर पालिका ने सामान्य बोर्ड की मंजूरी के बिना ओरेवा ग्रुप (अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड) को पुल के रखरखाव और संचालन का ठेका दिया था। कंपनी ने मार्च 2022 में पुल को नवीनीकरण के लिए बंद कर दिया था और 26 अक्टूबर को बिना अनुमति और जांच के इसे खोल दिया था। जांच में एसआईटी ने पुल की मरम्मत, रखरखाव और संचालन में कई खामियां पाई थीं।

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