सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया है। उन्होंने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि आखिर उन्होंने कौन-सा अपराध किया है? क्या जंतर-मंतर जाकर तिरंगा लहराना अपराध था? दिपके ने कहा कि सीजेपी एक स्वतंत्र दबाव समूह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह विपक्षी इंडिया ब्लॉक के खिलाफ है। इंडिया ब्लॉक और सीजेपी आंदोलन दोनों एक ही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह बुधवार को नागपुर स्थित दीक्षाभूमि जाकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। दिपके ने कहा कि नरेंद्र मोदी या कोई अन्य व्यक्ति आरएसएस की विचारधारा थोपने के कितने भी प्रयास कर ले, भारत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का ही अनुसरण करेगा।
नतीजे जानकर भी जंतर मंतर गए आशुतोष और सौरव
दिपके ने सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सौरव और आशुतोष जानते थे कि उन्हें जेल भेजा जा सकता है, फिर भी वे जंतर-मंतर गए और गर्व से तिरंगा फहराया। उन्होंने पूरे देश को दिखा दिया है कि मोदी जैसे दबंग का सामना करने का एकमात्र तरीका है कि कभी न झुकें, चाहे नतीजे कुछ भी हों।
हिरासत में भी कायम है कार्यकर्ताओं का हौसला
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीनों कार्यकर्ताओं की तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने लिखा, 'पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के अंदर हमारे कॉकरोच। कुछ भी उनका हौसला नहीं तोड़ सकता। क्या शानदार तस्वीर है।' इस पोस्ट में उन्होंने एक वकील को भी टैग किया।
'देश में थोपा जा रहा अघोषित आपातकाल'
सरकार पर निशाना साधते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में अघोषित आपातकाल थोप रहे हैं। नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने पूछा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने पर नेताओं ने ऐसा कौन-सा अपराध किया कि उन्हें जेल भेज दिया गया। दिपके ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार देश में आपातकाल लगाना चाहती है, तो आधिकारिक तौर पर लगाए। उन्होंने कहा कि 1975 में इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगे आपातकाल के दौरान भी राष्ट्रीय ध्वज लहराने पर ऐसी कार्रवाई नहीं हुई थी।
जंतर-मंतर पर प्रवेश की कोशिश के आरोप में कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, तीनों कार्यकर्ताओं को मंगलवार को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने की कोशिश के आरोप में एहतियातन हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब अधिकारियों ने एक दिन पहले ही जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना के संबंध में मामला भी दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, सीजेपी ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उसके सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है और विरोध की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है।
रत्ना सिंह बोलीं- वकीलों से मिलने नहीं दिया
वहीं, सीजेपी नेताओं की वकील रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लेने के बाद लंबे समय तक उनके वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। बुधवार सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर सिंह ने एक और अपडेट साझा किया। उन्होंने बताया कि मिली जानकारी के मुताबिक, तीनों कार्यकर्ताओं को अगले एक घंटे के भीतर मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जा सकता है। सिंह ने कहा कि हिरासत के 24 घंटे पूरे होने का समय करीब था। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को लगभग 24 घंटे तक वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और शुरुआत में हिरासत के कारण भी स्पष्ट नहीं किए गए।
‘ऊपर से मिले आदेशों पर काम कर रही पुलिस’
रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस पर मनमाने ढंग से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पुलिस कानून के बजाय ऊपर से मिले निर्देशों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के लिए पहुंचे लोगों को भी हिरासत में लिया गया। सिंह के मुताबिक, वकीलों और पार्टी के स्वयंसेवकों ने कार्यकर्ताओं से मिलने की कई बार कोशिश की, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद थाना प्रभारी (SHO) और अन्य पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई के पीछे उच्च अधिकारियों के निर्देशों का हवाला दिया। सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे आदेश कौन दे रहा है, जिनके चलते कानून की अनदेखी हो रही है।
ये भी पढ़ें:
एसआईआर विवाद: सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी, दिपके ने कहा- उनके हौसले को कोई नहीं तोड़ सकता
SIR विवाद के बीच बढ़ा सियासी तनाव
सीजेपी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब पार्टी और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा है।