कांग्रेस की तरफ से केंद्र सरकार पर मानसून सत्र की तारीखों का एलान करने बाद निशाना साधा गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि, पहलगाम आतंकी हमले के बाद विपक्ष लगातार विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहा था, जिससे बचने के लिए केंद्र ने ये फैसला किया है।
कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने संसद के मानसून सत्र की तारीखें 47 दिन पहले सिर्फ इसलिए घोषित की हैं ताकि वह विपक्ष, खासकर कांग्रेस और विपक्षी इंडिया गठबंधन की तरफ से मांगे गए विशेष सत्र से बच सके। विपक्ष की यह मांग हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उससे जुड़ी घटनाओं पर चर्चा के लिए की गई थी।
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कांग्रेस ने जयराम रमेश का आरोप
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'आम तौर पर संसद सत्र की तारीखें कुछ दिन पहले घोषित की जाती हैं। लेकिन इस बार 47 दिन पहले तारीखों की घोषणा की गई है – ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।' उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए किया गया है ताकि सरकार उन अहम मुद्दों से बच सके जिन पर विपक्ष ने तत्काल विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। कांग्रेस नेता ने कहा 'सरकार विशेष सत्र से तो भाग गई, लेकिन मानसून सत्र में इन मुद्दों से नहीं बच सकेगी। छह हफ्तों बाद प्रधानमंत्री को इन गंभीर राष्ट्रीय मसलों पर जवाब देना ही होगा।'
कांग्रेस ने इन मुद्दों पर चर्चा की मांग की
कांग्रेस के साथ-साथ तमाम विपक्षी पार्टियों ने कई मुद्दों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। जिसमें पहलगाम आतंकी हमला और आतंकियों को न्याय के कटघरे में लाने में विफलता, ऑपरेशन सिंदूर और उसका राजनीतिकरण। इसके साथ ही सिंगापुर में सीडीएस के बयान और उसकी संवेदनशीलता और भारत-पाकिस्तान की तुलना और पाकिस्तानी वायु सेना में चीन की भागीदारी के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बार-बार मध्यस्थता के दावे और विदेश नीति और कूटनीति में केंद्र की विफलताएं शामिल हैं।
सरकार ने मानसून सत्र की तारीखों का एलान
संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने बताया कि संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स ने यह सिफारिश की है, जिसे अब राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। बता दें कि, हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत गई थी, जिसके बाद विपक्ष ने इसे एक गंभीर सुरक्षा विफलता बताया और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। इसके साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने का भी आरोप लगाया गया।