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साधु-संतों का ऐलान, सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल फैसला नहीं आने पर भी बनेगा राम मंदिर

Tue, 21 Nov 2017 09:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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केंद्र सरकार के लिए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा चुनौती बन गया है। मुहिम से जुड़े साधु संतों ने मंगलवार को ऐलान किया कि सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल फैसला नहीं आने के बावजूद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा।
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उनका तर्क है कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है इसलिए मंदिर बनाने के लिए विधानसभा और संसद में प्रस्ताव पास कराया जाएगा। वहीं शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि पाकिस्तान व कुछ मुस्लिम संगठन नहीं चाहते कि अयोध्या विवाद का हल हो, क्योंकि इससे उनकी फंडिंग रुक जाएगी।

प्राचीन सिद्धपीठ श्री कालकाजी मंदिर परिसर में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े निर्वाणी अखाड़े के महंत स्वामी धर्मदास महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी, श्री कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने पत्रकार वार्ता में कहा कि अयोध्या में हर हाल में राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। 
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उन्होंने इसके कई तर्क भी दिए। इस मौके पर साधु-संतों ने शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के मंदिर व मस्जिद बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी ऐसा प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में देना चाहिए। इस संबंध में वे सुन्नी वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों से बातचीत करके मंदिर निर्माण के लिए सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
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श्रीश्री की मध्यस्थता पर आपत्ति

रविशंकर - फोटो : SELF
श्रीश्री की मध्यस्थता पर आपत्ति
संतों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह मंदिर निर्माण को लेकर फैसला देने में देरी नहीं करे। उन्होंने इस मुद्दे पर श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में ही किया जाएगा। परिषद वर्षों से यह लड़ाई लड़ रही है इसलिए अब वक्त नजदीक आने पर कोई श्रेय लेने के लिए आगे न आएं। वैसे उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके पक्ष में आएगा। 

हनुमान मूर्ति को एयर लिफ्ट करने पर एतराज
झंडेवालान स्थित हनुमान मूर्ति को एयर लिफ्ट कर दूसरी जगह स्थापित करने के अदालती आदेश की मंशा पर भी संतों ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि हम न्यायालय का सम्मान करते हैं लेकिन इस प्रकार हिंदुओं के हर मामले में हस्तक्षेप करना कतई ही उचित नहीं है और हम इससे स्वीकार नहीं करते। 
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