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IFFI-17 में ‘एस दुर्गा’ को दिखाने का केरल हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Tue, 21 Nov 2017 07:08 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
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s durga - फोटो : file photo
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केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोवा में हो रहे भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में मलयालम फिल्म ‘एस दुर्गा’ को शामिल किए जाने का आदेश दिया। कुछ दिन पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने महोत्सव में से फिल्म को निकाल दिया था। इस विवाद के कारण महोत्सव में से ज्यूरी के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था।
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मलयालम फिल्म के निर्देशक सनल कुमार शशिधरन की याचिका पर न्यायाधीश बी विनोद चंद्रण ने मंत्रालय को आदेश जारी किया कि 48वें आईएफएफआई में फिल्म की स्क्रीनिंग कराई जाए। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि सोमवार से शुरू हुए महोत्सव में फिल्म की प्रमाणित प्रति को दिखाया जाए। कोर्ट के आदेश पर सनल ने कहा कि मैं बहुत ही खुश हूं।

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यह सिनेमा और लोकतंत्र की जीत है। लोगों ने हम पर विश्वास किया और हमारे साथ खड़े रहे और इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। अध्यक्ष और अन्य जूरी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 13 सदस्यों की जूरी के सुझावों को पलटते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ‘एस दुर्गा’ और मराठी फिल्म ‘न्यूड’ को निकाल दिया था।
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वहीं मंत्रालय के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए शशिधरन कोर्ट चले गए थे। निर्देशक शशिधरन का कहना था कि फिल्म के वास्तविक नाम ‘सेक्सी दुर्गा’ का कुछ असामाजिक तत्वों ने गलत मतलब निकाल लिया था। उन्हें लगा कि यह देवी दुर्गा से जुड़ा है और वे विरोध करने लगे। जबकि इसका देवी दुर्गा या किसी भी धर्म से कोई संबंध नहीं है।
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एस दुर्गा में है क्या ?

s durga - फोटो : file photo
बता दें कि सनल कुमार शशिधरन की फिल्म ‘एस दुर्गा’ दो प्रेमियों की कहानी है। उत्तर भारतीय दुर्गा और दक्षिण भारतीय कबीर आधी रात को घर से भाग जाते हैं। दोनों ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन जा रहे होते हैं तभी दो छुटभैये बदमाश उनकी मदद करने का प्रस्ताव देते हैं।

आगे की फिल्म इस सफर के दौरान हुई घटनाओं की कहानी कहती है। फिल्म में देवी दुर्गा का अवतार मानी जाने वाली माँ काली की विशेष पूजा ‘गरुदान तोक्कम’ भी दिखाया गया है। इसे साल 2017 के लिए अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव रॉटरडैम में हिवोस टाइगर पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। उन्होंने आगे कहा कि यह हम सबकी जीत है। यह साबित करता है कि लोकतंत्र की हत्या नहीं की जा सकती है और कानून आम लोगों के लिए है।
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