राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने दाऊद इब्राहिम से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनके घर पर छापा मारा और इसके बाद सात बजे ईडी उन्हें अपने साथ पूछताछ के लिए ले गई। बताया गया है कि तकरीबन छह घंटे तक चली पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या होती है मनी लॉन्ड्रिंग?
आखिर यह मनी लॉन्ड्रिंग होती है क्या है जिसके मामले में नवाब मलिक फंस गए हैं। दरअसल कानून की नजर में आपराधिक गतिविधियों से बड़ी मात्रा में धन बनाने की अवैध प्रक्रिया को मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है। जैसे कि ड्रग की तस्करी या आतंकी गतिविधियों से मिला पैसा। इसमें ऊपर से ऐसा लगता कि धन वैध स्रोतों से आया हुआ है। यानी अवैध तरीके से कमाए गए धन को वैध तरीके से कमाए गए धन के रूप में दिखाना मनी लॉन्ड्रिंग हुआ। इसमें अवैध तरीके से कमाया गया काला धन सफेद हो जाता है और वैध मुद्रा में बदल जाता है। इसे आम बोलचाल में हवाला लेनदेन के रूप में जाना जाता है।
कितना गंभीर है यह अपराध
मनी लॉन्ड्रिंग को एक गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। इसी महीने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (धनशोधन रोकथाम कानून) के कुछ प्रावधानों की व्याख्या की मांग को लेकर दायर याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग हत्या से ज्यादा जघन्य अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नकदी की रफ्तार बिजली से भी तेज होती है, लिहाजा यदि ईडी को बड़ी मात्रा में मनी लॉन्ड्रिंग की सूचना मिले तो उसे उसी तेज गति से जांच करने की जरूरत होगी।
प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : ANI
कैसे होती है मनी लॉन्ड्रिंग?
अवैध रूप से प्राप्त धन को साफ दिखाने के लिए अपराधी कई तरह की मनी-लॉन्ड्रिंग तकनीकों का उपयोग करते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग और क्रिप्टोकरेंसी ने अपराधियों के लिए बिना पता लगाए पैसे ट्रांसफर करना और निकालना आसान बना दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास होते रहते हैं और अब इसके निशाने में आतंकी फंडिंग प्रमुख रूप से शामिल है। मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में आमतौर पर तीन चरण शामिल होते हैं, प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन।
इसे रोकने के लिए देश में क्या कानून है?
भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 में बना। लेकिन इसमें अब तक तीन बार 2005, 2009 और 2012 में संशोधन किया जा चुका है। 2012 के आखिरी संशोधन को जनवरी 2013 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। उसके बाद यह कानून 15 फरवरी से लागू हो गया है। इस कानून के तहत सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। वित्तीय अपराधों की जांच पड़ताल का अधिकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिया गया है। ऐसे अपराधों के ट्रायल के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाता है।
गिरफ्तारी की शक्ति किसके पास है?
पीएमएलए कानून के तहत गिरफ्तारी की शक्ति सिर्फ ईडी के निदेशक, उप निदेशक, सहायक निदेशक और ऐसे किसी अधिकारी के पास है जिसे केंद्र सरकार ने सामान्य या विशेष आदेश के जरिये अधिकृत किया हो। साथ ही अधिकारी को गिरफ्तारी से पहले तथ्यों और दस्तावेज की प्रथम दृष्ट्या जांच कर लिखित में कारण बताना अनिवार्य है।