आजकल देश में काला धन, काला धन बहुत चल रहा है। ये काला धन आखिर होता क्या है? सभी नोट तो काली स्याही से ही बनते हैं। सफेद स्याही से कौन सा धन बन रहा है? दरअसल धन काला या सफेद नहीं होता, काला होता है हमारा मन। मन को सफेद रखने की जरूरत है।
ये बातें जगद्गुरु शंकराचार्य श्रीश्री राजराजेश्वराश्रम ने अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के पंचायत भवन सभागार में पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर आयोजित समारोह में कही। शंकराचार्य यहां बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
समारोह में शंकराचार्य ने कहा कि, ‘नोटबंदी सही है या गलत.. यह मैं नहीं जानता। हम तो संन्यासी हैं, हमें इससे क्या। लेकिन इतना जरूर है कि नोटबंदी के बाद से दक्षिणा बंद हो गई है।’ उनकी इस बात से हॉल में हंसी के ठहाके गूंज उठे।