समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक इंटरव्यू में एस्टुटो ने भारत की G-20 अध्यक्षता की सराहना की और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के शुभारंभ को बहुत महत्वपूर्ण कदम बताया। भारत में राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं बहुत भाग्यशाली रहा हूं क्योंकि ये चार साल बदलाव के मामले में महत्वपूर्ण रहे हैं। भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी निश्चित रूप से बढ़ी है और दिन-ब-दिन मजबूत हो रही है।'
उन्होंने आगे कहा,'मैं इस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए दोनों पक्षों की ओर से स्पष्ट संकल्प देख रहा हूं।' अपने कार्यकाल के दौरान भारत-यूरोपीय संघ के रणनीतिक संबंधों में आए बदलावों के बारे में पूछे जाने पर एस्टुटो ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह व्यापक और गहरा होता जा रहा है। भारत और यूरोपीय संघ दो बड़े लोकतांत्रिक क्षेत्र हैं। नॉमिनल जीडीपी के हिसाब से भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस ब्लॉक है, इसलिए वे स्पष्ट रूप से बातचीत करने के लिए बाध्य हैं।'
यूरोपीय संघ के राजदूत ने अपनी अध्यक्षता में जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए भारत को बधाई भी दी। उन्होंने कहा, 'मैं इस बात से सहमत हूं कि भारत-मध्य पूर्व- यूरोप-आर्थिक गलियारे की शुरुआत वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है। यह बुनियादी ढांचे के बारे में है, जो सामाजिक रूप से तो टिकाऊ है, साथ ही राजकोषीय रूप से भी है।
उन्होंने कहा, 'बुनियादी ढांचे के लिए हमारा दृष्टिकोण इन सिद्धांतों पर आधारित हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हमारे पास कई खिलाड़ी एक साथ आ रहे हैं। आपने देखा होगा कि यह समझौता ज्ञापन व्यापक अर्थों में बुनियादी ढांचे के बारे में है। यह रेलवे के बारे में है। यह डिजिटल कनेक्टिविटी के बारे में है। यह व्यापार को सुविधाजनक बनाने के बारे में है। इसलिए मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।'