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ममता की ‘जंजीर’ से जकड़ा दो मासूमों का बचपन

Mon, 28 Mar 2016 05:59 AM IST
गजेंद्र सिंह/अमर उजाला, बरेली
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बच्चे को जंजीर में बांधती मां - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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यहां सूफी टोला में दो मासूमों को जंजीरों से बंधा देख कोई भी चौंक जाएगा। इनको बांधने वाले के प्रति मन नफरत से भर जाएगा लेकिन सच्चाई कुछ उलट है। मूक बधिर भाई-बहन कहीं दुर्घटना के शिकार न हो जाएं इसलिए दादी काम पर जाने से पहले उन्हें जंजीर से बांध जाती हैं। बच्चे भी इसे सजा के रूप में नहीं बल्कि सामान्य दिनचर्या के रूप में लेते हैं जैसे खाना, पीना, सोना। बेटी शाजिया थोड़ी बड़ी है लेकिन मासूम उवैस के बाल सुलभ नटखटपन की वजह से उस पर ज्यादा नजर रखनी पड़ती है।
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दोनों के चेहरों पर गजब की मासूमियत है। दादी उन्हें स्कूल भी भेजती है जहां विशेष शिक्षिका उन्हें दूसरे बच्चों के बीच पढ़ाती हैं। पिता की मौत के बाद मां इन मासूमों को छोड़कर कहीं चली गई। बूढ़ी दादी ही अब इनकी सब कुछ हैं। एक बार दोनों हादसे का शिकार हो गए तबसे दादी इतना डर गईं कि उनके लिए जंजीरें खरीद लाई ताकि वे अकेले बाहर न जा सकें। दादी उर्बी की आंखों में आंसू आ जाते हैं, वह कहती हैं कि अकेले बच्चों को महफूज रखने का दूसरा रास्ता नहीं सूझता।
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बहुत अच्छा लगता है स्कूल

स्कूल में पढ़ रहे बच्चे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शाजिया सात साल की है और उवैस पांच का। इनसे बड़ा भाई अली एक सामान्य बच्चा है, लेकिन ये दोनों सुन और बोल नहीं सकते। उवैस के पैदा होने के कुछ समय बाद ही उसके पिता शहजाद की कैंसर से मौत हो गई। मां शहाना दोनों बच्चों को छोड़कर चली गई। दादी उर्बी और चाचा आजाद के ऊपर दोनों की जिम्मेदारी है।

प्राथमिक विद्यालय बारादरी में जहां एक तरफ बच्चे शोर मचाने में मशगूल हैं। वहीं किनारे बैठे शाजिया और उवैस टिफिन से कुछ खा रहे हैं। स्कूल में क्या चल रहा है वे तो बस देख सकते हैं। जो बच्चे उनके साथ घुल-मिल गए हैं उनके साथ खेल भी लेते हैं। स्कूल इन्हें बहुत अच्छा लगता है। शिक्षक ने ब्लैक बोर्ड या कॉपी पर कुछ लिख कर दे दिया तो उसे उतार लिया। सवाल है तो जवाब लिख दिया। पहली कक्षा की मौखिक परीक्षा भी दोनों ने लिखकर दी।
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मेधावी हैं उवैस और शाजिया

पढ़ाई करता बच्चा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
उवैस और शाजिया को पढ़ाने वाली शिक्षक मकफरा तैय्यबा, शाहिना खातून और रेहाना बेगम बताती हैं कि लिखने में दोनों बच्चे अच्छे हैं। शाजिया मंडल स्तर की बेसिक खेल प्रतियोगिता में एक स्पर्धा में प्रथम आई। विशेष शिक्षक अनीता बताती हैं कि ये बच्चे पाठ को बहुत जल्द समझ जाते हैं।

दादी उर्बी बताती हैं कि बच्चों को इशारा करने के लिए कंकर रखना पड़ता है। कंकर फेंक कर बच्चे इशारा समझते हैं। इनको बाहर नहीं जाने दिया जाता। एक बार सुन न पाने के चलते शाजिया सड़क हादसे का शिकार हो चुकी है। 
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