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यूएनएससी: ओपन डिबेट की आज अध्यक्षता करेंगे पीएम मोदी, ऐसा करने वाले होंगे पहले प्रधानमंत्री

Mon, 09 Aug 2021 02:38 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस की अध्यक्षता करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इसका उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी स्थिति को मजबूत करना है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर खुली बहस की अध्यक्षता करेंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होने वाली यह बैठक भारतीय समय अनुसार शाम 5:30 बजे शुरू होगी।

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बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस की अध्यक्षता करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इसका उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी स्थिति को मजबूत करना है।

पीएमओ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली परिचर्चा की अध्यक्षता करने वाले नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इस खुली परिचर्चा के केंद्र में समुद्री अपराध और इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना होगा। इससे पहले भी यूएनएससी ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री अपराध के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है और कई प्रस्ताव पारित किए हैं। हालांकि, यह पहली बार होगा कि इस विषय पर उच्च स्तरीय और खुली चर्चा गहन तरीके से होगी। 
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पीएमओ ने कहा कि कोई एक देश समुद्री सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की चिंता नहीं कर सकता। लिहाजा यूएनएससी में इसे व्यापक विषय के रूप में आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। समुद्री सुरक्षा में एक व्यापक दृष्टिकोण होना चाहिए, जिससे वैध समुद्री गतिविधियों की रक्षा हो सके और साथ ही समुद्री क्षेत्र के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटा जा सके।

इनके शामिल होने की उम्मीद
नाइजर के राष्ट्रपति, केन्या के राष्ट्रपति, वियतनाम के प्रधानमंत्री, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन, कॉन्गो के राष्ट्रपति भी इस परिचर्चा में हिस्सा ले सकते हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस परिचर्चा का हिस्सा होंगे।

बता दें कि भारत इस साल अगस्त महीने के लिए यूएनएससी की अध्यक्षता कर रहा है। एक अगस्त से भारत ने यह जिम्मेदारी संभाल भी ली है। यूएनएससी में केवल पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस है। वर्तमान में भारत दो साल के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है।

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सुरक्षा परिषद की बैठक में अफगानिस्तान में हिंसा खत्म करने के लिए देशों से एकजुट होने की अपील

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने के एक हफ्ते के भीतर उनके देश ने अफगानिस्तान पर शक्तिशाली वैश्विक निकाय की महत्वपूर्ण बैठक की जिसमें सदस्य देशों से हिंसा और शत्रुता को खत्म करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया गया और इससे दुनिया को युद्धग्रस्त देश की गंभीर स्थिति दिखाने में भी मदद मिली।

भारत ने एक अगस्त को इस महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली। इस महीने के लिए परिषद के कार्यों की सूची के अनुसार अफगानिस्तान पर बैठक शामिल नहीं थी। लेकिन अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोम्मद हनीफ अतमार ने अफगानिस्तान पर ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक पर चर्चा कराने के लिए’ विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की थी।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि और अगस्त माह के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष टीएस तिरुमूर्ति ने संवाददाता सम्मेलन में अफगानिस्तान को लेकर कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इस पहलू पर सुरक्षा परिषद जल्द से जल्द गौर करेगी।

तिरुमूर्ति ने सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता का पहला हफ्ता खत्म होने पर कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अफगानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक महत्वपूर्ण थी। इसमें परिषद और उसके बाहर के सदस्यों को हिंसा तथा शत्रुता खत्म करने का आह्वान करने के लिए एकजुट किया गया और इससे अफगानिस्तान तथा उसके लोगों खासतौर से महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के समक्ष आ रही गंभीर स्थिति को बाहरी दुनिया को दिखाने में मदद मिली।’

उन्होंने कहा, ‘हम खुश हैं कि इस बैठक को प्राथमिकता दे सके और अध्यक्षता के पहले हफ्ते में ही इसे करा पाए।’ बैठक में परिषद के सदस्यों ने अफगानिस्तान में हिंसा बढ़ने की कड़ी निंदा की। अमेरिका ने कहा, ‘तालिबान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की यह बात जरूर सुननी चाहिए कि हम अफगानिस्तान पर सैन्य कब्जा या तालिबान के इस्लामिक शासन की वापसी स्वीकार नहीं करेंगे।’

अफगानिस्तान पर यह बैठक तब हुई है जब अफगान सरकार और दोहा में तालिबान के बीच बातचीत ठप हो गई और जब कुछ दिनों बाद 11 अगस्त को कतर में ‘विस्तारित ट्रोइका’ बैठक होनी है।

परिषद की बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के दूत गुलाम इसाकजई ने कहा कि तालिबान को देश में पनाह मिल रही है और पाकिस्तान से युद्ध के लिए जरूरी साजो-सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान में प्रवेश करने के लिए डूरंड रेखा के करीब तालिबान लड़ाकों के जुटने की खबरें और वीडियो, निधि जुटाने के कार्यक्रम, सामूहिक अंतिम संस्कार के लिए शवों को ले जाने और पाकिस्तानी अस्पतालों में तालिबान के घायल लड़ाकों के इलाज की खबरें आ रही हैं।’

उन्होंने कहा, ‘यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का न केवल घोर उल्लंघन है बल्कि इससे अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने के लिए पाकिस्तान के साथ सहयोगात्मक संबंध और विश्वास में कमी भी दिखाती है।’

तिरुमूर्ति ने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा कि क्षेत्र में आतंकवादियों की पनाहगाहों को फौरन नष्ट करना चाहिए और आतंकवादियों की आपूर्ति श्रृंखला तोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग आतंकवादियों को वित्तीय तथा साजो-सामान संबंधी सहयोग दे रहे हैं उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए।
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सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के पीएम गोंजाल्विस नहीं ले सकेंगे भाग 

बता दें कि बैठक से पहले एक बुरी खबर आई है कि सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के पीएम राल्फ गोंजाल्विस पर हमला हुआ है जिसके कारण वे इस बैठक में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। वहीं इस हमले की पीएम मोदी ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि मैं सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री राल्फ गोंजाल्विस पर भीषण हमले की निंदा करता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि मैं आपके शीघ्र स्वस्थ होने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं। हम आज समुद्री सुरक्षा पर UNSC के ओपन डिबेट में आपकी उपस्थिति को मिस करेंगे।
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