हरियाणा और राजस्थान सरकार ने पिछले साल पंचायतीराज कानून में संशोधन किए थे।
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"इंसान को मात्र शिक्षा ही ऐसी क्षमता देती है, जिससे वह उचित, अनुचित, अच्छे और बुरे के बीच फर्क कर पाता है।" सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) कानून, 2015 के विरोध में दायर याचिकाओं को रद्द करते हुए ये टिप्पणी की थी। हरियाणा सरकार ने पिछले वर्ष पंचायतीराज कानून में संशोधन कर ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से को पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया था। फैसले को समावेशी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आबादी भागीदारी सुनिश्चित करने के लक्ष्य के अनुरूप भी नहीं माना गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के कानून को उचित माना और उसके खिलाफ दायर याचिकाओं को रद्द कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देते हुए कांग्रेस को आगामी पांच राज्यों के चुनावों में 30 फीसदी अनपढ़ों को टिकट देने का सुझाव दिया। सुझाव लाजमी था, हालांकि उस सुझाव के साथ ही ये सवाल भी उठ कि प्रधानमंत्री ने ये सलाह हरियाणा और राजस्थान सरकार को क्यों नहीं दी?
राजस्थान सरकार ने पिछले साल कानून बनाकर अनपढों को पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया था। ऐसा कानून बनाने वाली वह मुल्क की पहली सरकार थी। रोचक बात यह है कि दोनों ही राज्यों में ये कानून भाजपानीत सरकारों ने बनाया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र के लिए भी बन सकता है नजीर
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के फैसले को उचित माना था।
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता बृंदा करात ने राजस्थान और हरियाणा सरकार के फैसलों को 'संभ्रांतवादी पुर्वाग्रह' कहा था, हालांकि प्रधानमंत्री मोदी समेत भाजपा के तमाम नेताओं ने ग्रामीण इलाकों को 'अशिक्षित' होने के कारण चुनाव लड़ने से वंचित किए जाने पर कभी टिप्पणी नहीं की।
भारतीय संविधान में फिलहाल लोकसभा और विधानसभा चुनावों की उम्मीदवारी के लिए तय योग्यताओं में शिक्षा शामिल नहीं है। राजस्थान और हरियाणा के कानूनों के बाद ऐसे हालात बने हैं कि एक अनपढ़ व्यक्ति पंचायत के चुनाव तो नहीं लड़ सकता, लेकिन वही व्यक्ति लोकसभा और विधानसभा के चुनाव लड़ सकता है।
जानकारों का मानना है कि हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) कानून, 2015 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने का दरवाजा खुल गया है और केंद्र सरकार भी ऐसे कानून बना सकती है।
प्रधानमंत्री अनपढ़ों को टिकट देने की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की नजीर पर अमल हुआ तो भविष्य में केंद्र की सरकार ही अनपढ़ों से चुनाव लड़ने का अधिकार छीन लेगी। और वह सरकार किसी भी दल की हो सकती है।