अपने संसदीय क्षेत्र में ई-रिक्शा और ई-बोट बांटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल की सियासत में हलचल मचा दी है। मोदी की चाल से उनके विरोधियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगी हैं।
चुनावी साल में निषादों और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सौगातों का मरहम लगाकर मोदी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। साफ कर दिया है कि उनकी नजर सपा और बसपा के परंपरागत वोट बैंक पर है। काशी में मोदी की ई-ड्राइव (ई-रिक्शा व ई-बोट) को भाजपा पीएम का मास्टर स्ट्रोक बता रही है।
भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि अगले साल सूबे में होने वाले विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण एक बड़ा कारक होगा। खासकर पूर्वांचल में पिछड़ों की अच्छी खासी तादाद है। यदि इन्हें पार्टी साधने में कामयाब हो जाती है तो सीटों की संख्या में इजाफा हो सकता है।