केंद्र सरकार बेशक 2022 तक सबको आवास देने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है लेकिन शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू का मानना है कि योजना पूरा करना उनके लिये बड़ी चुनौती है। उन्होंने इसके लिये निजी क्षेत्र से आगे आने अपील की है। वहीं, बायर्स को राहत देने के लिये रीयल एस्टेट अधिनियम के तहत एक साल में गठित होने वाला रीयल एस्टेट रेगुलेटर छह महीने पहले ही काम करने लगेगा। सरकार के दो साल पूरे होने पर केंद्रीय संसदीय कार्य व केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार से अपने मंत्रालय के बारे में विस्तार से बात की।
सवाल: रीयल एस्टेट अधिनियम बेशक नोटिफाई हो गया है। लेकिन इससे बायर्स को तत्काल राहत कहां मिली? उसे तो अभी भी एक साल इंतजार करना है।
जवाब: सरकार पर जनता का बहुत दबाव है। इसके लिये बहुत से आंदोलन भी चल रहे हैं। लोगों को अपने मकान चाहिये। सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है।
बृहस्पतिवार को भी हमने बैठक की है। अधिनियम के प्रावधानों में तयशुदा छह महीने की समय सीमा में कटौती करते हुये दो महीने में कानून बन जायेंगे।
इसके तुरंत बाद इसे राज्यों को भेज दिया जायेगा। वहीं, एक साल की जगह छह महीने में ही रीयल स्टेट रेगुलेटर का भी गठन हो जायेगा।
सवाल: क्या 2022 तक सबको आवास मिल जायेगा?
जवाब: हमारे लिये चुनौती बहुत बड़ी है। यह अकेले सरकार नहीं कर पायेगी। प्राइवेट सेक्टर को भी इसके लिये आगे आना चाहिये। इसके लिये हम सब्सिडी दे
रहे हैं। वहीं, प्रक्रिया का भी सरलीकरण कर रही है। साथ ही प्रपोजल से नहीं, जमीन दिखाने के बाद ही प्रोजेक्ट मंजूर होगा।
सवाल: तब क्या शहरी पलायन को रोका नहीं जा सका?
जवाब: रूके तो अच्छा होगा लेकिन संभव नहीं है। आज शहर में ज्यादा अवसर ज्यादा है। उद्योग, शिक्षा, रोजगार, मनोरंजन, स्वास्थ्य जैसी बेहतर सुविधायें हैं।
फिर, कृषि सेक्टर भी फायदे का सौदा नहीं रहा। पलायन रोक नहीं सकते, लेकिन जो शहरों में आ रहे हैं, उन्हें सुविधा दे सकते हैं। सरकार इस दिशा में तेजी
से काम भी कर रही है।
सवाल: आपके मंत्रालय की हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं के लिये वित्त तो समस्या नहीं बनेगा?
जवाब: अगर योजनाओं के लिये सारी तैयारी हो गई तो वित्त दिक्कत नहीं है। फिलहाल वैश्विक मार्केट डाउन है। चीन की विकास भी नाकारत्क है। पैसा है लोगों
के पास, निवेश के लिये उन्हें मौके की तलाश है। यह अवसर भारत में है। इसलिये बहुत सी वैश्विक कंपनियां हमारे पास आ रही है। सभी भारत में निवेश को
लेकर संजीदा हैं।
सवाल: दो सालों में गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ आपका अनुभव क्या रहा है?
जवाब: कुछ योजनाओं के साथ इस तरह की दिक्कत आ रही है। लेकिन यह राज्यों के ऊपर निर्भर है। संघीय ढांचे के तहत हम उन पर दबाव नहीं बना
सकते। राज्य काम करेंगे तो हम पैसा देंगे, प्रोत्साहन देंगे। काम नहीं करेंगे तो पैसा नहीं मिलेगा। और हां, योजनाओं में कोई राजनीतिक दखल नहीं है। तभी
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अभी प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, विदेश मंत्री, खुद हमारा व वित्त मंत्री का क्षेत्र शामिल नहीं है।
सवाल: सरकार को दो साल पूरे हो रहे हैं। अब शहरी विकास योजनाओं का कुछ भाजपा फायदा मिलेगा?
जवाब: राजनीतिक फायदा कितना होगा यह अलग बात है। लेकिन प्रधानमंत्री शहरों में तेजी से बदलाव लाना चाहते हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन, हृदय, स्वच्छ
भारत मिशन इसी दिशा में बढ़ रही हैं। नयी योजनाओं को बनाने में एक साल लगा। फिर इन्हें लांच किया। अब इसे शहरी इलाकों में ले जा रहे हैं। लोगों का भी
समर्थन मिल रहा है।
सवाल: चुनाव परिणामों का केंद्र सरकार पर कुछ असर पड़ेगा क्या?
जवाब: इससे सुधारों की गति में थोड़ी तेजी आयेगी। इसकी दो वजहें हैं। पहला, राज्य सभा के संख्या में बदलाव आयेगा। दूसरा, अभी तक कांग्रेस व वामदलों
का जो नकारात्मक रवैया है, उन्हें समझ में आयेगा कि लोगों का मूड क्या है। लोग डिलिवरी, विकास चाहते हैं। चुनाव परिणाम का संकेत यही है कि जो भी
विकास को रोकेगा, उसे नुकसान होगा। शायद कांग्रेस इसे समझ पायेगी।