प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्तों में उत्तराखंड के सपूतों की सूची बढ़ती जा रही है। पिछले ढाई साल के दौरान तमाम अहम पदों पर उत्तराखंड के लोगों की नियुक्तियां हुई हैं।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, पीएमओ में सचिव भास्कर खुल्बे के बाद अब देश की थलसेना की बागडोर भी पहाड़ के ही बेटे लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को सौंपी गई है। वह फिलहाल सहसेनाध्यक्ष हैं।
शनिवार को ही उत्तराखंड के ही अनिल कुमार धस्माना को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का चीफ चुना गया। वह मध्य प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी हैं। नवंबर में ही लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट देश के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) बनाए गए थे। इससे पहले, फरवरी 2016 में राजेंद्र सिंह कोस्ट गार्ड के प्रमुख बनाए गए थे। वह भी उत्तराखंड के चकराता से हैं।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को पीएम मोदी का विश्वस्त कहा जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर नोटबंदी तक डोभाल मोदी के हमराज रहे हैं। अब सेना प्रमुख और रॉ प्रमुख के पदों पर हुई नियुक्तियां भी बताती हैं कि मोदी उत्तराखंड मूल के अधिकारियों को तरजीह दे रहे हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत की विशेषज्ञता कश्मीर मामलों में है
ले. जनरल बिपिन रावत, नव नियुक्त सेना प्रमुख
11वीं गोरखा राइफल से आने वाले लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत की विशेषज्ञता कश्मीर मामलों में है। उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के मूल निवासी ले. जनरल बिपिन रावत एलओसी, चीन के साथ लगती एलएसी और पूर्वोत्तर में कई सैन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
उत्तर में सेना की री-स्ट्रक्चरिंग, पश्चिम में निरंतर जारी आतंकवाद तथा प्रॉक्सी वॉर और पूर्वोत्तर में स्थिति को लेकर ही लेफ्टिनेंट जनरल रावत को वरीयता दी गई है।
सेना की इंफेंट्री बटालियन से आने वाले लेफ्टिनेंट जनरल रावत को लड़ाकू अभियानों और सेना की विभिन्न गतिविधियों का तीन दशक का अनुभव है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) एलएस रावत सेना के डिप्टी चीफ रह चुके हैं।
धस्माना का बलूचिस्तान और कश्मीर में मजबूत नेटवर्क
अनिल धस्माना, नव नियुक्त रॉ चीफ
अनिल कुमार धस्माना एनएसए अजीत डोभाल के करीबी और विश्वस्त माने जाते हैं। पौड़ी के जयहरीखाल ब्लॉक के तोली गांव निवासी महेशानंद धस्माना के बेटे अनिल धस्माना को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का नया चीफ बनाया गया है। बलूचिस्तान, आतंकवाद और इस्लामिक मामलों पर उनकी जबरदस्त पकड़ है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर भी उन्हें व्यापक अनुभव हासिल है। धस्माना ने लंदन और फ्रेंकफर्ट सहित कई राजधानियों में काम किया है। उन्होंने यूरोप और सार्क डेस्क को भी संभाला है।
जानकारों के मुताबिक, पीएम मोदी और डोभाल बलूचिस्तान की विशेष योजना पर काम कर रहे हैं, ऐसे में धस्माना की नियुक्ति काफी अहम हो जाती है। धस्माना का बलूचिस्तान और कश्मीर में मजबूत नेटवर्क बताया जाता है।
अजीत डोभाल को पीएम मोदी का राइट हैंड माना जाता है
अजीत डोभाल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
20 जनवरी 1945 को पौड़ी गढ़वाल के घीड़ी बानेलस्यू में जन्मे अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राइट हैंड माना जाता है। अजमेर के मिलिट्री स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगरा विवि से अर्थशास्त्र में एमए किया। 1968 बैच के केरल कैडर र्के आईपीएस अधिकारी रहे डोभाल 2005 में आईबी चीफ पद से रिटायर हुए।
मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। वह 30 मई 2014 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने। उनके नेतृत्व में ही म्यांमार के खिलाफ सीमा पार जाकर जवाबी हमला और पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की गई।
भास्कर खुल्बे, सचिव, पीएमओ
नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे 1983 बैच के पश्चिम बंगाल बैच के आईएएस अधिकारी हैं। मूलत: तल्लीताल, नैनीताल निवासी भाष्कर खुल्बे की शिक्षा-दीक्षा नैनीताल से हुई। 1980 में उन्होंने कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर से बीएससी किया।
वेस्ट बंगाल फिशरीज कॉरपोरेशन, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल (डीओपी) व पश्चिम बंगाल के रेजीडेंट कमिश्नर के रूप में उनके काम को खूब सराहा गया। लंबे समय तक अलग-अलग पदों पर रहने के बाद 2014 में उन्हें पीएमओ में नियुक्ति मिली। करीब दो वर्ष की सेवा के बाद कुछ माह पूर्व ही बेहद ईमानदार और मेहनती छवि के भास्कर को पीएमओ सचिव के पद पर पदोन्नति मिली।
राजेंद्र सिंह कोस्ट गार्ड सेवाओं के पहले अधिकारी हैं जो इस रैंक तक पहुंचे हैं
राजेंद्र सिंह, कोस्ट गार्ड प्रमुख
भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के डायरेक्टर जनरल (डीजी) राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के चकराता से हैं। उन्होंने 25 फरवरी 2016 को कार्यभार संभाला था। राजेंद्र सिंह कोस्ट गार्ड सेवाओं के पहले अधिकारी हैं जो इस रैंक तक पहुंचे हैं।
उन्होंने भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एचसीएस बिष्ट से कार्यभार लिया। राजेंद्र सिंह गढ़वाल यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। उन्होंने वर्ष 1980 में भारतीय तटरक्षक सेवाओं को ज्वाइन किया था। उनके पहले तक नौसेना का अधिकारी ही कोस्ट गार्ड का चीफ नियुक्त किया जाता था।
ले. जनरल एके भट्ट, डीजीएमओ
मूलत: टिहरी गढ़वाल के खतवाड़ गांव के निवासी ले. जनरल एके भट्ट को कुछ दिन पूर्व ही डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) बनाया गया है। उनके पिता सत्यप्रकाश भट्ट ने लंबे समय तक भारतीय सेना में सेवाएं दी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मसूरी के हेंपटनकोर्ट और कांवेंट स्कूल सेंट जॉर्ज कॉलेज से हुई।
गोरखा राइफल्स में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्हें डीजीएमओ बनाया गया था। उनका परिवार पिछले करीब पांच दशक से मसूरी में ही निवास करता है। एके भट्ट मसूरी में क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।