केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने पिछले 9 वर्षों में शासन और व्यापार में आसानी के लिए 2,000 से अधिक नियमों और कानूनों को खत्म कर दिया है। सिंह ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पहले की सरकारों के विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे नियमों को दूर करने के लिए साहस और दृढ़ विश्वास दिखाया जो नागरिकों के लिए असुविधा पैदा कर रहे थे और जिनमें से कई ब्रिटिश राज के समय से बने हुए थे। उन्होंने कहा कि सुशासन का अंतिम उद्देश्य नागरिकों के जीवन को आसान बनाना है।
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में नवाचार, लोगों के जीवन को बदलना और नैतिक शासन हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकता रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मई 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद, दो से तीन महीने के भीतर राजपत्रित अधिकारियों से प्रमाण पत्र सत्यापित कराने की प्रथा को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद एक साल के भीतर प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से नौकरी की भर्ती में साक्षात्कार को समाप्त करने की बात कही ताकि सभी एक समान अवसर प्रदान किया जा सके।
बुजुर्गों की परेशानी कम करने के लिए पेंशन की प्रक्रिया को सरल बनाया
पेंशन के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चेहरा पहचानने की तकनीक इसलिए लाई गई ताकि बुजुर्ग नागरिकों को जीवन प्रमाणपत्र हासिल करने की थकाऊ प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़े। अधिकांश कामकाज को ऑनलाइन परिवर्तित किया गया और पारदर्शिता, जवाबदेही व नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मानव इंटरफ़ेस को न्यूनतम स्तर पर रखा गया।
शिकायत निवारण तंत्र के बारे में बात करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि शिकायत निवारण तंत्र को केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) में स्थानांतरित कर दिया गया। जहां इस सरकार के आने से पहले हर साल 2 लाख शिकायतें प्राप्त होती थी नई व्यवस्था के परिणामस्वरूप साल में लगभग 20 लाख शिकायतों का निपटारा किया जाने लगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के बारे मंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान प्रौद्योगिकी और टेलीमेडिसिन के उपयोग ने दिखाया है कि कैसे नवाचार दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर सकता है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने न केवल प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी नए नवाचारों को शुरू करने के लिए स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा दिया है। जिससे नागरिकों के जीवन में बदलाव आया है।
जितेंद्र सिंह बोले- 2047 तक भारत को 9 प्रतिशत बिजली परमाणु स्त्रोतों से
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि देश की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत कुल बिजली का नौ फीसदी परमाणु स्रोतों से हासिल करेगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के कामकाज की समीक्षा के बाद यह बात कही।
उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग को 2030 तक 20 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य हो हासिल करने के बाद भारत अमेरिका और फ्रांस के बाद दुनिया में परमाणु ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन जाएगा। सिंह ने कहा कि इस प्रगति का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है, जिन्होंने एक साथ 10 रिएक्टरों को मंजूरी देने का फैसला लिया। साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों के साथ संयुक्त उद्यमों के तहत परमाणु प्रतिष्ठानों को विकसित करने की भी अनुमति दी।