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Politics: कांग्रेस बोली- केंद्र गरीब विरोधी, राज्यों को OMSS से खाद्यान्न की बिक्री बंद; मणिपुर पर पूछे सवाल

Wed, 21 Jun 2023 05:17 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Politics: एफसीआई द्वारा जारी एक हालिया आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकारों के लिए मुक्त बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत गेहूं और चावल की बिक्री बंद कर दी गई है।
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जयराम रमेश (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कांग्रेस ने बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि उसने कर्नाटक सरकार की अन्न भाग्य योजना को विफल करने के लिए राज्यों को मुक्त बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत केंद्रीय पूल स्टॉक से खाद्यान्न की बिक्री बंद कर दी।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया - फोटो : एएनआई (फाइल)
चुनाव से पहले किया था पांच गारंटी का वादा
विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने कर्नाटक के लोगों को पांच गारंटी देने का वादा किया था। अन्न भाग्य योजना उनमें से एक है। इस योजना में राज्य के प्रत्येक गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार (बीपीएल) को दस किलो चावल देने का वादा किया गया है। 
 

जयराम रमेश - फोटो : पीटीआई (फाइल)
जयराम रमेश ने अपने ट्वीट में क्या कहा
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक ताजा ट्वीट में मोदी सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट में कहा, मोदी की गरीब विरोधी और प्रतिशोध की राजनीति का सबसे हालिया घटनाक्रम- 
13 मई 2023 : कर्नाटक के लोगों ने पीएम मोदी और भाजपा को व्यापक रूप से खारिज किया। 
02 जून 2023:  कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने एक जुलाई से अन्य भाग्य गारंटी लागू करने की घोषणा की जो प्रत्येक गरीब परिवार को दस किलो मुफ्त अनाज देगी। 
13 जून 2023: केंद्र ने मुक्त बाजार बिक्री योजना के तहत एफसीआई से राज्यों को चावल की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए परिपत्र जारी किया। यह अन्न भाग्य योजना को रोकने के लिए किया गया है। 

उन्होंने कहा कि कर्नाटक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को 3,400 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करने के लिए तैयार था। लेकिन खिड़की बंद थी। हालांकि, एफसीआई इथेनॉल उत्पादन और पेट्रोल के सम्मिश्रण के लिए 2,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल बेचना जारी रखे हुए है। खाद्य सुरक्षा हर समय सबसे बड़ा चिंता का विषय होना चाहिए। 
 

FCI : भारतीय खाद्य निगम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एफसीआई ने अपने आदेश में कही यह बात
एफसीआई द्वारा जारी एक हालिया आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकारों के लिए मुक्त बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत गेहूं और चावल की बिक्री बंद कर दी गई है। हालांकि, ओएमएसएस के तहत चावल की बिक्री पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और कानून-व्यवस्था की स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाले राज्यों के लिए 3,400 रुपये प्रति क्विंटल की मौजूदा दर पर जारी रहेगी।एफसीआई बाजार मूल्यों को कम करने के लिए आवश्यकता के अनुसार केंद्रीय पूल स्टॉक से निजी पक्षों को ओएमएसएस के तहत चावल बेच सकता है।
 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : अमर उजाला
योजना के लिए आगे आई पंजाब सरकार
कांग्रेस दावा कर रही है कि केंद्र सरकार के इस कदम से समाज के सबसे वंचित तबके को नुकसान पहुंचेगा। कर्नाटक में बीपीएल परिवार के प्रत्येक सदस्य को पहले से ही पांच किलो चावल प्रदान किया जा रहा था। अब नई सरकार द्वारा इसे बढ़ाकर 10 किलोग्राम किया जा रहा है। पंजाब सरकार कर्नाटक की अन्न भाग्य योजना के लिए आवश्यक चावल की आपूर्ति के लिए आगे आई है।
 

मणिपुर हिंसा (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस ने मणिपुर संकट पर फिर प्रधानमंत्री को घेरा
कांग्रेस ने आज यह भी कहा कि मणिपुर को जले हुए 50 दिन हो गए हैं और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संकट के समय में हिंसा प्रभावित राज्य को जानबूझकर नजरअंदाज करके अपने कर्तव्य में पूरी तरह से विफल रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भाजपा नीत सरकार पर मणिपुर में 'अधिकतम चुप्पी, न्यूनतम शासन' का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा की तमाम खबरों के बीच हम खुद को याद दिलाएं कि मणिपुर के दर्द, परेशानी और पीड़ा का आज लगातार 50वां दिन है।
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Social Media
पीएम ने त्रासदी पर एक शब्द भी नहीं कहा: रमेश
रमेश ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'कई मुद्दों पर 'ज्ञान' देने वाले प्रधानमंत्री ने दुखद रूप से राज्य को घेरने वाली त्रासदी पर एक शब्द भी नहीं कहा है, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मिलने का समय नहीं दिया है, जिन्होंने उनसे समय मांगा है, और इसका कोई संकेत नहीं दिया है कि उन्हें परवाह भी है या चिंतित हैं। उन्होंने संकट के समय में मणिपुर को जानबूझकर नजरअंदाज करके भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कर्तव्य को पूरी तरह से विफल कर दिया है। मणिपुर पर उनका व्यवहार सबसे चौंकाने वाला और समझ से परे है।'

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