रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर काफी पहले से जोर दिया जा रहा है, इस मुद्दे पर पीएम मोदी कई बार तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ बैठक कर चुके थे।
मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया पर खासा ध्यान दिया है। इस कड़ी में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और 14 हेलिकॉप्टर खरीदने से संबंधित सौदों के लिए निविदा वापस लेने का फैसला किया है।
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सरकारी सूत्रों के मुताबिक बैठक में फ्रांस से हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल खरीदने और रूसी हेलीकॉप्टरों के ओवरहाल के सौदे पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। रक्षा मंत्रालय ने बाय ग्लोबल कैटेगरी के तहत आयात सौदों की समीक्षा शुरू कर दी है, जो पूरी तरह से विदेशी वेंडर्स से प्राप्त की जाती हैं।
ये सौदे भारतीय वेंडर्स के पक्ष में बंद हो सकते हैं
रक्षा मंत्रालय ने कई सौदों को बंद करने और स्थगित करने की सूची में रखा है साथ ही मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है क्या इन सौदों को भारतीय वेंडर्स के पक्ष में बंद कर सकते हैं। इन सौदों में वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम्स, टोड आर्टिलरी गन, वर्टिकली लॉन्च की गई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम, मिग -29 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के साथ अतिरिक्त पी-8आई सर्विलांस एयरक्राफ्ट आदि शामिल हैं।
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कामोव हेलिकॉप्टर सौदे भी सूची में
विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग के तहत सामान्य प्रयोजन मशीन गन जैसे सौदे भी लिस्ट में हैं और एक मिसाइल सौदे की भी जांच होने जा रही है। रूस के साथ अरबों डॉलर के कामोव-226 हेलिकॉप्टर सौदे को भी लिस्ट में रखा गया है। कामोव-31 शिपबोर्न हेलिकॉप्टर्स के साथ-साथ क्लब क्लास एंटी-शिप मिसाइल भी सूची में हैं।
बता दें कि पीएम मोदी देश रक्षा क्षेत्र में दृढ़ता से आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़े, इसके लिए तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत समेत रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं और इसलिए अब इन पहलों पर जोर दिया जा रहा है।