प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहा कि वे तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण न होने दें। साथ ही उन्होंने प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेताओं से अनुरोध किया कि वे तीन तलाक के मामले में सुधार की प्रक्रिया शुरू करें। मौलाना महमूद ए मदनी समेत संगठन के कई नेताओं ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत सद्भावना और मेलजोल में है।
विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को नागरिकों में भेदभाव का कोई अधिकार नहीं है और भारत की विशेषता विविधता में एकता की है। तीन तलाक के मुद्दे पर मोदी ने अपनी बात दोहराई कि मुस्लिम समुदाय को इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होने देना चाहिए। पीएमओ के अनुसार उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से इस दिशा में सुधार शुरू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
बयान के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल ने तीन तलाक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के रुख की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी, महासचिव मौलाना महमूद ए मदनी, अंजुमन-ए-इस्लाम, मुंबई के अध्यक्ष जाहिर आई काजी, अख्तरल वासी और मौलाना बदरद्दीन अजमल शामिल थे।