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Modi 3.0: 100 दिन में 13 मोर्चों पर आगे बढ़ी सरकार को विपक्ष ने इन मसलों पर घेरा, क्यों आसान नहीं आगे की राह?

Tue, 17 Sep 2024 07:20 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

Modi 3.0: राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सरकार के गठन से लेकर मंत्रिमंडल बांटने तक भले ही सबकुछ ठीक हो। लेकिन, भाजपा के लिए अपने कोर एजेंडे को अमलीजामा पहनाना पहले की तरह इतना आसान नहीं होगा। तीसरे कार्यकाल के मुख्य एजेंडे यूसीसी, धर्मांतरण विरोधी कानून पर गठबंधन सहयोगियों की राय, समर्थन और उनका रुख देखने लायक होगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे है। उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे हो गए है। पहली बार गठबंधन सरकार चला रहे पीएम मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के एजेंडे में खास बदलाव नहीं किया है। समान नागरिक संहिता, वक्फ बोर्ड विधेयक की चर्चा और एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर उनकी सरकार आगे बढ़ती दिख रही है। इसके अलावा, सरकार कई मोर्चों पर आगे बढ़ी है। सरकार ने 100 दिनों में 13 मोर्चों पर काम किया है। हालांकि, इन सौ दिनों में भाजपा सरकार कई मुद्दों पर चूकी है। जिसको लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों से लेकर मणिपुर हिंसा, हिंडनबर्ग रिपोर्ट, नीट पेपर लीक, महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति गिरने, वक्फ बोर्ड विधेयक, सीधी भर्ती (लैटरल एंट्री) और ट्रेन दुर्घटना जैसे मुद्दों को लेकर सरकार कटघरे में रही है।

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मोदी सरकार 3.O के 100 दिनों के कामकाज को देखें तो तमाम चर्चा के बावजूद गठबंधन सरकार में मंत्री पद और विभाग वितरण को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी तेलुगू देश पार्टी (टीडीपी), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने नई सरकार के गठन को लेकर प्रधानमंत्री पर पूर्ण विश्वास जताया। भाजपा ने पहले के दो कार्यकाल की तरह ही सभी अहम मंत्रालय अपने पास रखे, जबकि पहले यह कहा जा रहा था कि जेडीयू और टीडीपी जैसे दल इनकी मांग कर सकते हैं। पीएम मोदी और अमित शाह सरकार गठन, मंत्रिमंडल और संसद के पहले सत्र को चलाने की सभी चुनौतियों को बहुत सरल तरीके से सुलझाने में कामयाब रहे। भविष्य में भी यही स्थिति जारी रहने के संकेत साफ दिख रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सरकार के गठन से लेकर मंत्रिमंडल बांटने तक भले ही सबकुछ ठीक हो। लेकिन, भाजपा के लिए अपने कोर एजेंडे को अमलीजामा पहनाना पहले की तरह इतना आसान नहीं होगा। तीसरे कार्यकाल के मुख्य एजेंडे यूसीसी, धर्मांतरण विरोधी कानून पर गठबंधन सहयोगियों की राय, समर्थन और उनका रुख देखने लायक होगा। विरोधों के बावजूद अपने वोट बैंक को साधे रखने के लिए इन मुद्दों पर आगे बढ़ना पार्टी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सहयोगी दल में टीडीपी और जेडीयू मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखना चाहते हैं। ऐसे में भाजपा के लिए अपने एजेंडे पर आगे बढ़ना भाजपा के लिए मुश्किल भरा हो सकता है।
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इन राज्यों में चुनाव भी बड़ी चुनौती
लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद मोदी की लोकप्रियता को लेकर सवाल हो रहे है। इन नतीजों के बाद पहली बार राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। पहला चुनाव हरियाणा और जम्मू-कश्मीर का है, उसके बाद तीन और राज्यों के चुनाव होने वाले हैं। इन सभी राज्यों में भाजपा पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है। हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में बीजेपी के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है। कई सर्वेक्षण में हरियाणा में बीजेपी की स्थिति चुनाव में ठीक नहीं बताई जा रही है। वहीं, महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के साथ पार्टी कैसे आगे बढ़ेगी, इस पर भी नजर है। जनवरी और फरवरी तक होने वाले झारखंड और दिल्ली के चुनावों में भी बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती है।

100 दिन पर कांग्रेस ने घेरा भाजपा को
इधर, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन को जनता से अधूरे वादे, सरकार में व्यवस्थित भ्रष्टाचार और यूटर्न का बोलबाला बताया है। कांग्रेस ने पेपर लीक, शिक्षा कुप्रबंधन, रोजगार और महंगाई पर जैसे मुद्दों पर सरकार को विफल करार दिया है। कांग्रेस ने सरकार के पहले 100 दिन पर दस्तावेज जारी कर सरकार की विफलताएं गिनाई है।

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