मोबाइल ऐप एचपीजेड के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय लगातार कार्रवाई कर रहा है। इस बीच एक बार फिर निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग ऐप से जुड़े लोगों और विभिन्न संस्थाओं की 278 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क कर ली है। बता दें, एचपीजेड पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की है।
करोड़ों का चूना लगाने में शामिल शेल कंपनियां
प्रवर्तन निदेशालय ने इससे पहले 176.67 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विभिन्न व्यक्तियों और चीनी-लिंक्ड सहित शेल (डमी) संस्थाओं से संबंधित 278.71 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश जारी किए गए थे। ईडी ने बताया कि शेल कंपनियां कथित तौर पर निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने में शामिल पाई गईं।
धोखाधड़ी से धन कमाने के उद्देश्य के लिए शुरू किया गया
मनी-लॉन्ड्रिंग के इस पूरे मामले का खुलासा 2021 में हुआ था, जब नागालैंड के कोहिमा में साइबर अपराध पुलिस थाने ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। कंपनी पर निवेशकों का धोखा देने का आरोप है, जिसके लिए एचपीजेड टोकन ऐप का इस्तेमाल किया गया था। ऐप का इस्तेमाल अवैध ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और बिटकॉइन में निवेश के लिए धोखाधड़ी से धन कमाने के उद्देश्य के लिए शुरू किया गया था। ईडी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने दावा किया था कि 57 हजार का निवेश करने पर तीन महीने तक प्रतिदिन चार हजार रुपये का रिटर्न देने का वादा किया था। लेकिन एक बार रिटर्न दिया और नए फंड की मांग शुरू कर दी। ईडी ने बताया कि मामले में ईडी द्वारा रोकी गई अपराध की कुल आय 455.37 करोड़ है।