बंगलूरू की एक विशेष एनआईए अदालत ने बुधवार को भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा के दो कट्टरपंथी सदस्यों को दोषी ठहराते हुए सात साल जेल की सजा सुनाई। असम के अख्तर हुसैन लस्कर उर्फ मोहम्मद हुसैन और बंगाल के अब्दुल अलीम मंडल उर्फ मोहम्मद जूबा पर क्रमश: 41,000 और 51,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
30 अगस्त को दर्ज हुआ था केस
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रवक्ता ने कहा कि एजेंसी ने उनके खिलाफ पिछले साल 30 अगस्त को केस दर्ज किया था। उन्होंने कहा कि एनआईए ने भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
अफगानिस्तान में प्रवास करने की रची थी साजिश
दो सदस्यों की सजा प्रतिबंधित संगठन के आकाओं की पहचान करने और मुकदमा चलाने के संघीय एजेंसी के निरंतर प्रयासों में एक बड़ी सफलता है। अधिकारी ने कहा कि जांच से पता चला कि दोनों लोगों ने अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में प्रवास करने की साजिश रची थी, जहां उनका प्रशिक्षण भी लेने का इरादा था।
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा, दोनों व्यक्तियों ने आतंक और हिंसा के माध्यम से अपने भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए AQIS की साजिश के हिस्से के रूप में खुरासान में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद भारत में एक विशेष समुदाय के सदस्यों के खिलाफ जिहाद (पवित्र युद्ध) करने की योजना बनाई थी। कथित तौर पर दोषी अन्य युवाओं को खुरासान में प्रवास करने के लिए प्रेरित करने के अलावा उन्हें कट्टरपंथी बनाने और एक्यूआईएस में भर्ती करने की भी प्रक्रिया में थे।