मिजोरम के मुख्य विपक्षी दल मिजो नेशनल फ्रंट के विधायक और चकमा स्वायत्त जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य रसिक मोहन चकमा को एक साथ दो पद संभालने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है। एक अधिकारी ने रविवार को मामले की जानकारी दी। जिला परिषद के एक सदस्य की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष लालबियाकजामा ने चकमा को कारण बताओ नोटिस दिया। जिसमें अध्यक्ष ने एमएनएफ विधायक से पूछा कि उन्हें राज्य विधानमंडल और चकमा परिषद दोनों के सदस्य के रूप में क्यों बने रहना चाहिए।
लालबियाकजामा ने उन्हें सूचित किया कि चकमा मौजूदा मिजोरम राज्य विधानमंडल सदस्य (अयोग्यता हटाना) (संशोधन) अधिनियम, 2006 की प्रासंगिक धाराओं के तहत अयोग्य घोषित होने के लिए उत्तरदायी हैं। गौरतलब है कि चकमा को 15 अप्रैल या उससे पहले अपना जवाब देने को कहा गया था।
राज्यपाल और स्पीकर से कार्रवाई की आग्रह
जनवरी में जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) के चकमा परिषद सदस्य डोयमॉय डेवांग चकमा ने राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष को अलग से एक शिकायत सौंपी थी, जिसमें एमएनएफ विधायक की दोहरी सदस्यता पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। डोयमोय ने तर्क दिया था कि रसिक मोहन चकमा मौजूदा कानून के मुताबिक तब तक चकमा परिषद के सीईएम का पद नहीं संभाल सकते, जब तक वह राज्य विधानमंडल के सदस्य हैं।
एमएनएफ विधायक रसिक मोहन चकमा ने दावा किया कि उन्हें कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि राज्य विधानमंडल और जिला परिषद दोनों की दोहरी सदस्यता रखने का मतलब लाभ का पद नहीं है। उन्होंने कहा कि वह समय सीमा से पहले अपना जवाब सौंप देंगे। 60 वर्षीय राजनेता चकमा स्वायत्त जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य रहे हैं क्योंकि उन्होंने पिछले साल मई में छठी बार स्थानीय चुनाव सफलतापूर्वक लड़ा था।