रिपोर्ट बताती है कि बसपा के चार विधायक दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, जिनकी औसत संपत्ति में 4,51 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के 107 विधायकों की संपत्ति में 3.89 करोड़ रुपए और कांग्रेस के 53 विधायकों की औसत संपत्ति में 3.23 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। संपत्ति में सबसे ज्यादा इजाफा बसपा की 140 प्रतिशत, भाजपा 85 प्रतिशत और कांग्रेसी विधायकों की संपत्ति 49 प्रतिशत बढ़ी। भाजपा के 107 विधायकों ने 2013 में 4 करोड़ से ज्यादा संपत्ति दर्शाई थी, जो 2018 में औसत साढ़े 8 करोड़ हो गई।
कांग्रेसी विधायकों ने 2013 में 6 करोड़ और 2018 में 9 करोड़ की सपंत्ति दिखाई। वहीं बसपा उम्मीदवारों ने 2013 में 3 करोड़ की संपत्ति दर्शायी, जो 2018 में बढ़ कर 7 करोड़ पहुंच गई। भाजपा के टिकट पर विजयराघवगढ़ से चुनाव लड़ रहे और प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके संजय सत्येन्द्र पाठक सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। उन्होंने 226 करोड़ रुपए की संपत्ति दिखाई है। उनकी मध्य प्रदेश में सायना नाम से हेरिटेज होटल की चेन है। वहीं राज्य के निर्वतमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी 7 करोड़ संपत्ति घोषित की है।
अनूपपुर विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार रामलाल रौतेल 14 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। प्रदेश का चुनावी मैदान इसलिए भी खास क्योकि इस बार ऐसे 146 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति तो 1 करोड़ रुपए से अधिक बताई लेकिन अभी तक निर्वचन आयोग को आय का स्रोत और आयकर विवरण नहीं दिया है।
इस बार मध्य प्रदेश में संजय नाम के तीन प्रत्याशी है, जिनकी संपत्ति 100 करोड़ से अधिक है।
सबसे अमीर उम्मीदवार
| प्रत्याशी |
विधानसभा क्षेत्र |
संपत्ति |
| संजय पाठक, भाजपा |
विजयराघवगढ़ |
226 करोड़ |
| संजय शुक्ला, कांग्रेस |
इंदौर |
103.71 करोड़ |
| संजय शर्मा , कांग्रेस |
तेंदुखेडा |
139 करोड़ |